बाराबंकी। इस बार यूपी बोर्ड के नतीजों ने सिर्फ अंक नहीं दिए, बल्कि एक सशक्त संदेश भी दिया कि प्रतिभा एसी कमरों और कोचिंग की चमक से नहीं, बल्कि खेतों की मेड़, कच्चे रास्तों और संघर्ष से भी निकलती है। जिले के गांवों ने इस बार शहरों को सीधी चुनौती देते हुए मेरिट सूची में अपना दबदबा कायम किया है।
टॉप-10 में शामिल जिले के करीब 98 फीसदी छात्र-छात्राएं गांवों से हैं। किसी के पिता किसान हैं, तो कोई दिहाड़ी या प्राइवेट नौकरी से घर चलाता है। मगर इन हालातों ने बच्चों के हौसलों को और मजबूत बना दिया।
हाईस्कूल में प्रदेश टॉपर बनी अंशिका हरख ब्लॉक के अंदका गांव की हैं। किसान पिता कुंदन लाल की यह बिटिया खेतों की पगडंडियों से निकलकर प्रदेश की नंबर वन कुर्सी तक पहुंच गई। मसौली ब्लॉक के बरियारपुर गांव की अदिति ने हाईस्कूल में दूसरा स्थान हासिल कर दिखा दिया कि सीमित संसाधन सपनों की उड़ान को रोक नहीं सकते। किसान पिता विशाल सिंह ने बताया, बेटी ने मेहनत को ही अपना सबसे बड़ा हथियार बनाया।
इंटरमीडिएट में प्रदेश में दूसरा स्थान हासिल करने वाली श्रेया वर्मा हरख गांव की रहने वाली हैं। उनके पिता सत्यवान प्राइवेट नौकरी करते हैं और मां गृहिणी हैं। रोजाना 10 किलोमीटर का सफर ऑटो से तय कर शहर पढ़ने आने वाली श्रेया ने यह साबित कर दिया कि दूरी मंजिल को रोक नहीं सकती।
इंटरमीडिएट में तीसरे स्थान पर रहीं पूजा पाल गढ़िया रज्जाकपुर गांव की निवासी हैं। पिता प्राइवेट नौकरी करते हैं और बेटी की पढ़ाई के लिए परिवार शहर में रह रहा है।