बाराबंकी। बैंक ऑफ इंडिया व एचडीएफसी बैंक में करोड़ों के फर्जीवाड़े के मामले में थानों में कई केस दर्ज किए गए। बैंक ऑफ इंडिया के मामले में मैनेजर समेत तीन लोग जेल में हैं। कई अन्य लोगों के नाम प्रकाश में आए थे, जबकि एचडीएफसी बैंक के खातों में फर्जी तरीके से किए गए लेनदेन में एक भी गिरफ्तारी नहीं हुई। पीड़ित थाने व कोतवाली के चक्कर लगा रहे हैं। दोनों मामलों में 12 मुकदमे दर्ज हैं।
जैदपुर थाना क्षेत्र के बरौली मलिक गांव स्थित बैंक ऑफ इंडिया के मैनेजर अमन वर्मा, असिस्टेंट मैनेजर शैलेंद्र प्रताप व मास्टर माइंड सुरेश मधु रावत समेत कई लोग तमाम भोले-भाले लोगों को झांसा देकर बैंक लाए और उसके नाम से नौ से 12 लाख रुपये तक निकाल लिए। लोगों को जब पता लगा, जब बैंक से कुर्की का नोटिस लोगों के पास पहुंचा। इसे लेकर मैनेजर समेत तीन लोगों को दो माह पहले जेल भेजा जा चुका है।
अब तक जैदपुर में तीन, सतरिख में तीन, हैदरगढ़ में दो समेत आठ केस दर्ज हो चुके हैं। अभी एक दिन पहले हैदरगढ़ में शिक्षामित्र के नाम से लाखों का ऋण निकालने का केस दर्ज हुआ है। मुकदमों में कई लोगों के नाम सामने आए हैं। वहीं, एफडीएफसी बैंक में झांसा देकर लोगों का खाता खुलवाने के बाद खाताधारकों को भनक तक नहीं लगी और लाखों का लेनदेन हाेता रहा है।
दो माह पहले सबसे पहले सतरिख थाना क्षेत्र के शेखनापुरवा के प्यारेलाल ने इसे लेकर लेकर केस दर्ज कराया। इसके बाद जैदपुर व शहर कोतवाली में केस दर्ज किए गए। दो माह में कई जिलों से हुए लेनदेन में कई लोगों के नाम प्रकाश में आ चुके हैं। लेकिन इस मामले में कोई गिरफ्तारी व खुलासा नहीं हो सका है। अधिकारियों का तर्क है कि गत दिनों विवेचकों व थाना प्रभारियों के तबादले से जांच धीमी हुई है।
सीओ सदर सुमित त्रिपाठी ने बताया कि बैंक से जुड़े़ धोखाधड़ी के मामलों में जांच की जा रही है। कई और नाम सामने आए है। जल्द ही फर्जीवाड़ाें का खुलासा किया जाएगा। इसे लेकर विवेचकों से समीक्षा की जा रही है।