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1000 रुपये में धान बेचने का मजबूर किसान

Sat, 08 Oct 2016 11:21 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/बाराबंकी
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paddy - फोटो : amar ujala
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धान कटकर किसानों के घर क्या पहुंचने लगा है पहले से ही घात लगाए बैठे आढ़तिए उसे लूटने में जुट गए हैं। समर्थन मूल्य 1470 रुपये है लेकिन बिचौलिए करीब एक हजार में किसानों का धान खरीद रहे हैं। व्यापारियों ने किसानों से पिछले एक सप्ताह में करीब दस हजार क्विंटल धान किसानों से खरीद कर डंप कर लिया है। 
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सरकारी धान की खरीद एक नवंबर से शुरू होगी। लेकिन जिले में पिछले दस दिनों से धान की कटाई तेज हो गई है। अगैती धान करीब 25 फीसदी तक कट चुका है।  खेत खाली हो जाने की वजह से इनमें से ज्यादातर किसान आलू और सरसों की फसल की बोआई की तैयारी में लग गए हैं।

इसके लिए किसानों को पैसे की जरूरत है और यह जरूरत किसान धान बेचकर पूरी कर रहे हैं। लेकिन प्रति क्विंटल करीब 450 रुपये के नुकसान पर। निजी व्यापारी और आढ़तिए किसानों की इसी मजबूरी का जमकर फायदा उठा रहे हैं।
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शासन ने धान का समर्थन मूल्य 1470 रुपये घोषित कर रखा है लेकिन निजी व्यापारी किसानों का धान एक हजार रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीद रहे हैं। आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए कम दामों पर धान बेचना किसानों की मजबूरी बन गया है। वहीं सूत्रों का कहना है जब तक सरकारी खरीद शुरू होगी तब तक 50 प्रतिशत से ज्यादा किसान अपना धान निजी व्यापारियों और आढ़तियों के हाथों बेच चुका होगा। 

करोड़ों का वारा न्यारा करेंगे बिचौलिए
धान खरीद इस वर्ष एक नवंबर से शुरू हो रही है। तब तक आढ़तिए किसानों से काफी मात्रा में धान की खरीद कर चुके होंगे। यही आढ़तिए और व्यापारी सरकारी खरीद शुरू होने पर किसानों की खतौनी का प्रयोग कर औने-पौने दामों पर खरीदा गया धान सरकारी दामों पर बेचे कर मोटा मुनाफा कमाएंगे। यह खेले काफी पुराना है लेकिन इस खेल पर कोई भी रोक नहीं लगा पा रहा है। 

पिछले साल नहीं पूरा हुआ था लक्ष्य
पिछले साल जिले में धान खरीद का लक्ष्य 65 हजार मीट्रिक टन था। लेकिन खरीद फसल तैयार होने के 20 दिन बाद शुरू हुई थी। जिसका फायदा उठाकर बिचौलियों ने किसानों से औने पौने दाम पर खरीद की थी। इस कारण सिर्फ 12 मीट्रिक टन खरीद हो पाई थी। हांसेमऊ के राजेश का कहना है हमें आलू के लिए खेत खाली करना जरूरी है।

हम कितने दिन फसल काटकर घर में रखे रहेंगे। जो दाम मिल रहा है फसल निकाल रहे हैं। अगले महीने का इंतजार नहीं कर सकते। जहांगीराबाद के अजय यादव ने कहा कि हर साल यही होता है। सरकार बिचौलियों को फायदा पहुंचाने के लिए ही देर से खरीद शुरू करती है। जिससे किसान की मजबूरी हो जाती है कि वो आढ़तिए को फसल बेच दें।

किसानों से औने पाने दामों पर धान की खरीद निजी व्यापारियों और आढ़तियों से की जा रही है इसकी अभी तक किसी ने कोई शिकायत नहीं की है। फिर भी इसकी जांच की जाएगी और ऐसा करने वाले व्यापारियों और आढ़तियों के खिलाफ जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी। -अनिल कुमार सिंह, एडीएम।
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