सूरतगंज। रामनगर तहसील क्षेत्र की बतनेरा ग्राम पंचायत में करोड़ों रुपये की लागत से बाढ़ राहत केंद्र बनाया गया है। इसका उद्देश्य बाढ़ प्रभावित ग्रामीणों को सुरक्षित आश्रय देना था। यह केंद्र इन दिनों वीरान पड़ा है। बाढ़ का पानी बढ़ने पर ग्रामीण राहत केंद्र के बजाय बांध पर रहना अधिक सुविधाजनक मान रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि राहत केंद्र में रहने की व्यवस्था तो है, पर पशुओं को रखने की समुचित व्यवस्था नहीं है। उनका मुख्य व्यवसाय पशुपालन और खेती है। ऐसे में पशुओं को छोड़कर राहत केंद्र में रहना उनके लिए संभव नहीं होता है।
बतनेरा सहित आसपास के गांवों में हर वर्ष बारिश में बाढ़ आती है। घाघरा-सरयू नदी का जलस्तर बढ़ने पर ग्रामीणों को पलायन करना पड़ता है। प्रशासन ने इसी स्थिति के लिए राहत केंद्र बनाया था। सुंदर नगर गांव से राहत केंद्र 200 मीटर दूर है, जबकि अन्य गांवों से एक किलोमीटर दूर है। बाढ़ के समय घर से सामान और पशुओं को इतनी दूर ले जाना मुश्किल होता है। ग्रामीणों के अनुसार, बांध पर रहने का एक फायदा यह है कि वे वहां से अपने घरों और सामान की निगरानी कर सकते हैं। बाढ़ का पानी कम होने पर वे तत्काल अपने घर लौट सकते हैं। पशुओं को बांध पर रखना आसान होता है।