बाराबंकी। नेपाल से छोड़ा गया पानी तराई के गांवों में तबाही मचाने लगा है। इससे सरयू नदी का जलस्तर खतरे के निशान से 51 सेंमी. ऊपर पहुंच गया है। तराई के 60 गांवों में पानी भर जाने की वजह से लोग घर छोड़ने को मजबूर हो गए हैं। ज्यादातर परिवारों ने तटबंध पर आशियाना बना लिया है। अभी तक गांवों में फंसे लोग भी परिवारीजनों के साथ तटबंध पर पहुंचने लगे हैं। गांव से निकलने के लिए नाव न मिलने की वजह से बाढ़ पीड़ितों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। उधर एसडीएम सिरौलीगौसपुर प्रतिपाल सिंह ने भी बाढ़ प्रभावित गांवों का जायजा लिया और तटबंध पर बसे लोगों से मिलकर उनका हाल जाना।
नेपाल द्वारा मंगलवार सुबह करीब आठ बजे सरयू नदी में करीब तीन लाख क्यूसेक पानी और छोड़ गया है। इससे उफनाई सरयू का पानी तराई के रामनगर क्षेत्र के पांच गांव, रामसनेहीघाट के 26 और सिरौलीगौसपुर के 29 गांवों तक पहुंच गया है। एल्गिन ब्रिज पर बने कंट्रोल रूम के अनुसार नदी का पानी खतरे के निशान से 51 सेंमी. ऊपर बह रहा है। जलस्तर लगातार बढ़ने का क्रम जारी है जिससे तराई के और कई गांव के बाढ़ की चपेट में आने का खतरा बना हुआ है। नदी के बढ़ते जलस्तर को देखते प्रशासन भी एलर्ट हो गया है। तीनों तहसीलों के एसडीएम को सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं।
कोटवाधाम क्षेत्र के टेपरा, बघौलीपुरवा,सरायसुरजन, नव्वनपुरवा, परसवाल, नैपुरा, रेता, तेलवारी, कहारनपुरवा, गोबरहा, सनावा भयकपुरवा, विहड़, इटहुआ पूरब आदि गांव नदी के पानी में डूब चुके है। कई गांवों के करीब पानी पहुंच गया है। ग्रामीणों का कहना है कि नदी का जलस्तर बढ़ने की गति को देखते हुए बचे गांव भी बाढ़ की चपेट में आ सकते हैं। इस खतरे को देखते हुए ग्रामीण परिवारीजनों और मवेशियों के साथ सुरक्षित स्थानों पर जा रहे हैं। उन्हें नाव न मिलने की वजह से काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। गहरे पानी में होकर तटबंध तक पहुंच रहे है। उधर दरियाबाद विधायक सतीश शर्मा ने तहसीलदार अखिलेश कुमार सिंह के साथ सरायसुरजन, भयरवकोल के 340 ग्रामीणों को राहत सामग्री वितरित कराई। नदी के उस पार बसे गांव में राहत सामग्री दी गयी।