बाराबंकी। नदियों में जाल डालकर मछलियों को पकड़कर, उन्हें बेच कर जीवकोपार्जन करने वाले मछुआरों को अब सालाना तीन हजार रुपये मिलेंगे। इसके लिए उन्हें अपने मोबाइल से मत्स्य विभाग के संबंधित एप पर पंजीकरण करना होगा। इससे उन्हें अन्य योजनाओं का भी लाभ मिलेगा।
प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत जिले के करीब साढ़े छह सौ मछुआरों को इसका लाभ मिलेगा। जून, जुलाई और अगस्त माह में नदियों में शिकार करने पर प्रतिबंध होने से सरकार ने उन्हें यह लाभ देने की व्यवस्था की है।
पिछले दो वर्षों में कोरोना संक्रमण की वजह से मछली पालकों व बिक्री करने वालों को भी बड़ा नुकसान हुआ है। सरकार ने मछुआ समुदाय या मत्स्य पालन व्यवसाय से जुड़े व्यक्ति, संस्था, सहकारी समितियों को आर्थिक मदद देने का निर्णय लिया है।
प्रत्येक वर्ष जून, जुलाई और अगस्त माह में मछली पकड़ने पर प्रतिबंध लगा होने से नदियों में जाल डालकर मछलियां पकड़ कर उनकी बिक्री के जरिए जीवकोपार्जन करने वाले मछुआरों को सरकार ने अब हर साल एक मुश्त 3000 रुपये की आर्थिक मदद देने की व्यवस्था की है। इससे जिले के 26 मत्स्य पालन समितियों के करीब साढ़े छह सौ मछुआरों को लाभ मिलेगा।
सहायक निदेशक मत्स्य वीएस चौरसिया ने बताया कि नदियों में शिकार करने वाले जिले के करीब साढ़े छह सौ मछुआरों को इसका लाभ मिलेगा। जून, जुलाई और अगस्त में नदियों में शिकार पर प्रतिबंध लगने से उन्हें यह लाभ देने की व्यवस्था की गई है। पंजीकरण शुरु हो गया है, हर साल तीन हजार रुपये मिलेंगे।