बाराबंकी। वन क्षेत्र देवा से होकर गुजरी शारदा नहर में पानी की कमी से तड़पकर एक मादा डॉल्फिन की मौत हो गई। शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया। कुछ ही घंटे बाद नहर में एक और मादा डॉल्फिन के होने का पता लगा। बाराबंकी व लखनऊ की वन विभाग की संयुक्त टीम ने करीब पांच घंटे तक रेस्क्यू कर उसे नहर से निकालकर सरयू नदी में छोड़ दिया। नहर मेंं पानी बंद होने से कहीं-कहीं पानी एकदम कम हो गया है। इसलिए यहां पर और भी डॉल्फिन हो सकती हैं।
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार बृहस्पतिवार शाम लखनऊ जिले की सीमा पर माती नहर पुल के पास ग्रामीणों ने नहर में डॉल्फिन के फंसे होने की सूचना दी। टीम मौके पर पहुंची तो करीब डेढ़ क्विंटल वजन की एक डॉल्फिन पुल के पास फंसी मिली।
टीम ने रेस्क्यू कर उसे निकाला मगर तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। इस पर विभाग ने शव को पोस्टमार्टम के लिए कब्जे में ले लिया। टीम के जाने के बाद ग्रामीणों को यहां से करीब 200 मीटर दूर नहर में ही करीब दो से ढाई फीट गहरे पानी में हलचल दिखी।
इस सूचना पर वन विभाग की टीम फिर मौके पर पहुंची। यहां लखनऊ की सीमा होने के कारण देवा के रेजर मयंक सिंह की टीम के साथ लखनऊ कुकरैल के रेंजर कमलेश कुमार की टीम मौके पर पहुंची। लखनऊ से डॉल्फिन विशेषज्ञ डॉ. शैलेंद्र कुमार भी अपनी टीम के साथ आए।
पानी कम था, इसलिए डॉल्फिन तुरंत दिख गई। आनन-फानन उसका रेस्क्यू किया गया। टीम ने ग्रामीणों के सहयोग से डॉल्फिन को एक वाहन में लादने के बाद रामनगर क्षेत्र में सरयू नदी में प्रकृतिवास के लिए छोड़ दिया।
डीएफओ आकाशदीप बधावन ने बताया कि लखनऊ से बाराबंकी के देवा क्षेत्र की ओर से आई शारदा नहर में पानी बंद कर दिया गया है। इससे जलीय जीवों पर संकट गहरा गया है। पूरी नहर पर नजर रखी जा रही है।
गर्मी व ऑक्सीजन की कमी बर्दाश्त नहीं कर पाती डॉल्फिन
डॉल्फिन को दुनिया का अनोखा व मनुष्यों की तरह बुद्धिमान जीव माना जाता है लेकिन वह गर्मी व ऑक्सीजन की कमी बर्दाश्त नहीं कर पाती। संभवत: इसीलिए मौत हुई है। डॉल्फिन पानी में 990 फीट की गहराई तक जा सकती है। इतना ही नहीं, पानी से 20 फीट ऊपर तक उछल भी सकती है।
जलाया गया डॉल्फिन का शव
डॉल्फिन के शव का पोस्टमार्टम के बाद वन विभाग के परिसर में जला दिया गया। ऐसा इसलिए ताकि डॉल्फिन के जमीन में गड़े अंगों को खोदकर कोई तस्करी आदि न कर सके। डॉल्फिन के दांत व खाल बेशकीमती मानी जाती है।