बाराबंकी। जैदपुर थाना क्षेत्र में सवा साल पहले नाबालिग बेटी के साथ दुष्कर्म के गंभीर आरोपों में घिरे पिता को आखिरकार अदालत से बड़ी राहत मिल गई। सुनवाई के दौरान मामला पूरी तरह पलट गया और अदालत ने आरोपों को झूठा करार देते हुए पिता को दोषमुक्त कर दिया। इतना ही नहीं, झूठा मुकदमा दर्ज कराने वाली सास के खिलाफ मिथ्या वाद चलाने के भी आदेश दिए गए हैं।
मामला 30 सितंबर 2024 का है, जब एक महिला ने अपने दामाद पर आरोप लगाया था कि उसने 15 वर्षीय नातिन के साथ दुष्कर्म किया है। आरोप पत्र में यह भी कहा गया था कि बेटी का मानसिक संतुलन ठीक नहीं रहता और दामाद आए दिन मारपीट करता है। पुलिस ने अक्तूबर 2024 में आरोप पत्र दाखिल किया और दिसंबर में अदालत ने सुनवाई शुरू की। सुनवाई के दौरान महिला ने खुद स्वीकार किया कि उसकी बेटी और दामाद के बीच अक्सर झगड़े होते थे और वह बेटी को दामाद से अलग कराना चाहती थी। इसी मकसद से उसने रिपोर्ट दर्ज कराई थी। सबसे अहम मोड़ तब आया, जब नाबालिग बेटी ने अदालत में बयान दिया कि उसके पिता ने उसके साथ कोई गलत काम नहीं किया। उसने बताया कि नानी के कहने पर उसने दरोगा और मजिस्ट्रेट के सामने बयान दिया था। अपर सत्र न्यायाधीश व विशेष न्यायाधीश ज्ञान प्रकाश शुक्ल की अदालत ने सभी तथ्यों और बयानों को देखते हुए अभियुक्त पिता को दोषमुक्त कर दिया। साथ ही न्यायालय को गुमराह करने और झूठा मुकदमा दर्ज कराने के आरोप में वादिनी महिला के खिलाफ दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 344 के तहत अलग से कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं।