बाराबंकी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मेक इन इंडिया के तहत वोकल फॉर लोकल का नारा दिया था। लक्ष्य था कि स्थानीय स्तर पर उपलब्ध फसलों आदि का इस्तेमाल कर उत्पाद तैयार किए जाएं, जिन्हें देश व विदेशों में भेजा जा सके। आज तमाम ब्रांड अपने पैक्ड आलू चिप्स बाराबंकी में बेच रहे हैं, जिसके एवज में हम और आप मोटी कीमत भी दे रहे हैं। लेकिन यहां उपलब्ध आलू कौड़ियों के भाव बिक रहा है। वजह है कि स्थानीय स्तर पर आलू प्रसंस्करण इकाई लगाने की ओर ध्यान नहीं दिया जा सका।
जिले में इस बार करीब छह लाख मीट्रिक टन आलू का उत्पादन हो रहा है और हर साल यह आंकड़ा बढ़ता ही जा रहा है। आलू की खपत के लिए यहां पर्याप्त संसाधन मौजूद नहीं हैं। यहां करीब 48 खाद्य प्रसंस्करण यूनिटें संचालित हो रही हैं, जिनमें सियाराम फूड इंडस्ट्रीज इचौली टिकैतनगर, एमजी फूड प्रोडक्ट्स व एकता स्नैक्स इंडस्ट्रीज औद्योगिक क्षेत्र कुर्सी रोड नमकीन बनाने का काम कर रही हैं।
इनके द्वारा अपने उत्पादों में आलू का इस्तेमाल तो किया जाता है, लेकिन वह भी लखनऊ व कानपुर जैसे शहरों से मंगाया जाता है। इसके पीछे वजह यह है कि यहां का आलू गुणवत्ता जांच में फेल हो गया था। ऐसे में यहां के किसानों को आलू की न तो अच्छी कीमतें मिल पा रही हैं और न ही भंडारण की समस्या से निजात। हाल ही में संपन्न हुए इंवेस्टर्स समिट के दौरान केले और आलू से उत्पाद तैयार करने को जोर तो दिया गया था, लेकिन इस पर अमल नहीं किया जा सका है।
पेप्सिको इंडिया से हैं उम्मीदें
पेप्सिको इंडिया ने खाद्य प्रसंस्करण यूनिट लगाने के लिए एमओयू हस्ताक्षर किया था। कंपनी की ओर से यहां पैक्ड स्नैक्स की फैक्ट्री लगाए जाने की तैयारी की जा रही है। सोमैय्या नगर में जमीन कोे लेकर कागजी कार्रवाई की जा रही है। माना जा रहा है कि जल्द ही काम भी शुरू हो जाएगा। जिला उद्योग केंद्र के सहायक प्रबंधक आलोक कुमार सिंह ने बताया कि पेप्सिको प्लांट को लेकर तैयारियां चल रही हैं।
क्या कहते हैं किसान
करीब सौ कट्टी आलू का उत्पादन हुआ है, लेकिन कोल्ड स्टोर से टोकन नहीं मिल पाया है। अभी खेत में ही आलू ट्रॉली में लदा है। आलू का भाव भी काफी कम मिल रहा है।
- देवराज यादव, मोहनपुर बिसई
कोल्ड स्टोर से टोकन न मिलने के कारण खुले आसमान के नीचे आलू भंडारण करना पड़ रहा है। कपूर कोल्ड स्टोर बसारा में संपर्क किया था, लेकिन कोई निष्कर्ष नहीं निकला।
शिवबरन, मोहनपुर