बाराबंकी। मौसम में आए बदलाव का असर जिला अस्पताल में दिखाई दे रहा है। इंफ्लूएंजा से ग्रसित मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। जिला अस्पताल से लेकर सीएचसी तक में इस तरह से मरीज लगातार आ रहे हैं। चिकित्सकों का कहना है कि वायरस हमेशा वैरिएंट बदलता रहता है। सर्दी, जुकाम और बुखार के मरीजों में एच3एन2 इंफ्लूएंजा का लक्षण पाया गया है। इससे परेशान होने की जरूरत नहीं है। केवल भीड़भाड़ से बचें और ऐसे मरीज मास्क जरुर पहने जिससे इस पर अंकुश सके।
जिला अस्पताल में तैनात वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. राजेश कुशवाहा बताते हैं कि अन्य दिनों की अपेक्षा ओपीडी में मरीजों की संख्या 1500 से ऊपर पहुंच गई है। इनमें सबसे ज्यादा मरीज सर्दी, जुकाम और बुखार के आ रहे हैं। इनमें से कईयों में एच3एन2) इंफ्लूएंजा के लक्षण पाए गए हैं।
रोग को लेकर ज्यादा परेशान होने की जरुरत नहीं है मौसम में जब बदलाव आता है तो इस तरह के मरीजों की संख्या बढ़ जाती है। वायरस समय-समय पर अपना स्वरुप (वैरिएंट) बदलता रहता है। बताया कि शनिवार को जिला अस्पताल में 1300 मरीज आए इनमें बुखार के 403 मरीज देखे गए।
बचाव के लिए क्या करें
इंफ्लूएंजा बचाव के लिए भीड़भाड़ वाले स्थानों पर जाने से बचें और शारीरिक दूरी बना कर रहे। सर्दी, जुकाम, खांसी और बुखार वाले मरीजों को मास्क पहनकर ही बाहर निकलना चाहिए। ऐसे में खांसने और छींकने से दूसरे के संक्रमित होने का खतरा बना रहता है। अपने हाथों का बार-बार साबुन से धोएं जिससे संक्रमण से बचा जा सके। यदि एक सप्ताह से अधिक समस्या हो तत्काल चिकित्सक से सलाह लें।
आईसीयू में लटक रहा ताला
जिला अस्पताल में बने आईसीयू वार्ड में ताला लटक रहा है। यहां पर तैनात कार्डियोलॉजिस्ट के सेवानिवृत्त हो जाने के बाद इस विभाग का हाल बेहाल है। यहां पर आने वाले हृदय रोगियों को उपचार की सुविधा नहीं मिल पा रही है जिससे लोग निजी चिकित्सकों से अपना उपचार कराने को मजबूर हैं।
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एच3एन2 एक नए तरह का वैरिएंट है लेकिन इससे घबराने की जरुरत नहीं है। थोड़ा सावधानी बरत कर इस रोग से बचा जा सकता है। विभाग इस रोग से निपटने को पूरी तरह से तैयार है और प्रत्येक सीएचसी पर इसके लिए दस बेड आरक्षित किए गए हैं, अस्पतालों में पर्याप्त मात्रा में दवाएं भी उपलब्ध हैं।
डॉ. अवधेश कुमार यादव, सीएमओ