बाराबंकी। सरयू का जलस्तर घटकर भले ही चेतावनी बिंदु से दो सेमी नीचे पहुंच गया हो लेकिन कटान का सिलसिला जारी है। खेती योग्य भूमि नदी की धारा में समाने से किसानों की रातों की नींद गायब हो गई है। कोटवाधाम प्रतिनिधि के अनुसार सरयू के किनारे बसे गांवों में हर वर्ष बाढ़ के साथ कटान भी तराई के लिए बड़ी समस्या बन जाती है।
इन दिनों सनावा, टेपरा, भैरवकोल और कहरनपुरवा गांव के सामने नदी तेजी से खेतों का कटान कर रही है। जलस्तर में उतार-चढ़ाव के साथ कटान की रफ्तार भी बढ़ रही है, जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। यह अलग बात है कि नदी का जलस्तर चेतावनी बिंदु 105.050 से दो सेमी नीचे पहुंच गया है।
सनावा गांव के किसान निर्भय सिंह, रेखा, विवेक, राजितराम और सर्वजीत के खेत लगातार कटान की चपेट में हैं। किसानों का कहना है कि कटान के कारण वे खेतों में फसल की बोआई भी नहीं कर पा रहे हैं। उधर, कहरनपुरवा गांव के पास कटान रोकने के लिए बाढ़ खंड की ओर से बचाव कार्य कराया जा रहा है।
हालांकि जलस्तर घटने के बावजूद जारी कटान से ग्रामीणों में भय का माहौल बना हुआ है। एसडीएम सिरौलीगौसपुर अनिल कुमार सरोज और तहसीलदार बालेंदु भूषण वर्मा लगातार प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण कर रहे हैं। एसडीएम ने बताया कि नदी के सीधे बहाव वाले कुछ स्थानों पर कटान हो रही है, जहां रोकथाम के लिए कार्य कराया जा रहा है।
बाढ़ प्रभावित 26 गांवों का निरीक्षण कर तैयारियों का लिया जायजा
रामसनेहीघाट। नवागत उपजिलाधिकारी विजेंद्र कुमार उपाध्याय ने कार्यभार ग्रहण करने के दूसरे ही दिन बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया। उन्होंने राहत एवं बचाव तैयारियों का जायजा लिया। उपजिलाधिकारी ने अधिकारियों को लापरवाही न बरतने के स्पष्ट निर्देश दिए। शुक्रवार को एसडीएम विजेंद्र कुमार उपाध्याय ने नायब तहसीलदार सुधाकर पांडे के साथ संभावित बाढ़ ग्रस्त गांवों का दौरा किया।
ये गांव सरयू नदी से प्रभावित होते हैं। उन्होंने कोयलावर, टिकरी, गुनौली सहित 26 गांवों की बाढ़ संबंधी तैयारियों की समीक्षा की। गुनौली गांव में एसडीएम ने ग्रामीणों से उनकी समस्याएं और आवश्यकताएं जानीं। उन्होंने आश्वस्त किया कि प्रशासन पूरी सतर्कता से स्थिति पर नजर रखे हुए है। इसके बाद एसडीएम ने खजूरी और रानीमऊ स्थित बाढ़ चौकियों का निरीक्षण किया।