गोमती नदी के सिल्हौर घाट पर पीपा पुल पर की जा रही वसूली रोकने और यहां पर पक्का पुल बनाए जाने की मांग को लेकर 23 दिनों से किसानों का धरना चल रहा है लेकिन प्रशासन द्वारा मांगें न मानने पर शुक्रवार से भारतीय किसान यूनियन के पदाधिकारी व कार्यकर्ताओं ने जल सत्याग्रह शुरू कर दिया।
यूनियन के प्रांतीय महासचिव ने शासन व प्रशासन पर वादा खिलाफी का आरोप लगाते हुए कहा कि नदी का पानी का जहरीला है। ऐसे में कार्यकर्ताओं को कुछ भी होता है तो इसकी जिम्मेदारी शासन व प्रशासन की होगी। साथ ही कहा कि जब तक घाट पर वसूली रोकी नहीं जाती और पक्के पुल के निर्माण का ठोस आश्वासन नहीं मिलता है, तब तक जल सत्याग्रह जारी रहेगा।
धरने के दौरा यूनिनयन के प्रदेश महासचिव मुकेश सिंह ने कहा कि भाकियू के लोग जन समस्याओं को लेकर 18 मई से धरना देे रहे थे तो प्रशासन ने झूठा आश्वासन देकर धरना को एक सप्ताह के लिए रुकवा दिया था। लेकिन प्रशासन ने मांगों को पूरा नहीं किया तथा किसानों को छला है।
यूनियन इस छल को बर्दाश्त नहीं करेगी। इसका मुंह तोड़ जवाब देते हुए किसान आर-पार की लड़ाई लड़ेंगे। अपने हक को पाकर ही दम लेंगे। इसके लिए चाहे भाकियू के लोगों को अपनी जान ही गवानी पड़े। उन्होंने प्रशासन को चेताते हुए कहा कि नदी का पानी जहरीला है जिसमें जन समस्याओं को लेकर जल सत्याग्रह किया जा रहा है।
ऐसे में अगर सत्याग्रहियों को कुछ भी होता है तो इसका जिम्मेदार शासन प्रशासन होगा। जिला उपाध्यक्ष देव नरायन शर्मा ने कहा कि जनसमस्याओं को लेकर जल सत्याग्रह आंदोलन शुरू कर दिया है, जो मांगे पूरी होने तक अनवरत चलता रहेगा। महामंत्री संजय पांडेय ने कहा कि अब तक प्रशासन हमें आश्वासन देकर बेवकूफ बना रहा था। मजबूरन जल सत्याग्रह करना पड़ रहा है।
किसानों को मांग के अनुरूप जिलाधिकारी महोदय ने इस मामले की फाइल कमिश्नर साहब के यहां भेज दी है। किसी भी काम में समय तो लगता ही है।
-पूर्णिमा सिंह, एसडीएम रामसहनेही घाट
जल सत्याग्रहियों को बताया गया है कि फाइल कमिश्नर साहब के पास भेज दी गई है। पुल के लिए सेतु निगम को भी लिखा जा चुका है। थोड़ा वक्त तो लगेगा।
-अजय यादव, जिलाधिकारी