देवा। स्थानीय राजकीय बीज भंडार से गेहूं, सरसों, चना, और मसूर का बीज प्राप्त करने में किसानों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। सर्वाधिक परेशानी उन किसानों को हो रही है जिन्होंने यूपी एग्रीकल्चर की वेबसाइट पर अपनी कम जमीन दिखाकर पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) कराया है। उन्हें उनकी आवश्यकता के अनुसार बीज नहीं मिल पा रहा है। चना और मटर के बीज की कम खेप आने के कारण किसानों को खुदरा बाजार से महंगे दामों पर बीज खरीदना पड़ रहा है। कुछ किसानों ने अपने एक खेत की खतौनी पर पंजीकरण कराया है, जबकि मौके पर उनके पास अधिक जमीन है।
ग्राम प्रधान आनंद कुमार ने बताया कि राजस्व अभिलेखों में उनके नाम नौ बीघा जमीन दर्ज है, लेकिन उन्होंने सिर्फ दो बीघा के चक का पंजीकरण कराया था। इसलिए जब उन्होंने अंगूठा लगाया, तो मशीन पर केवल दो बीघा जमीन ही प्रदर्शित हुई और उन्हें दो बीघा के हिसाब से ही गेहूं का बीज मिला। किसान रामू यादव ने बताया कि थंब इंप्रेशन के बाद उन्हें मिनी किट निशुल्क मिली है। किसान अवध राम ने बताया कि उनके पिता का कुछ माह पूर्व देहांत हो गया है। अभी तक जमीन उनके नाम विरासत में नहीं हुई है, जिसके कारण वह पंजीकरण नहीं करा पाए और उन्हें बीज नहीं मिल सका। अब उन्हें बाजार से बीज खरीदना पड़ेगा।
बीज भंडार प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा ने बताया कि उन्हें मसूर का बीज 4 क्विंटल 96 किलोग्राम मिला है। इसमें से 220 पैकेट में से अब तक 176 पैकेट का वितरण किया जा चुका है। सरसों की मिनी किट के 1067 पैकेट मिले हैं। इसमें से 701 मिनी किट का निशुल्क वितरण किया जा चुका है। वहीं मटर के बीज के 20 किलो के 11 पैकेट मिले हैं, जिनका वितरण किया जा चुका है। चना के बीज के मिले 5 पैकेट वितरित किया जा चुका है। गेहूं बीज की 40 किलो की बोरी के लिए किसानों से 975 रुपये का भुगतान लिया जा रहा है। बताया कि घुने हुए गेहूं के बीज को अलग करा दिया गया है।