कोटवाधाम। जिले के किसानों के लिए नकदी फसल के रूप में मेंथा की खेती आज भी महत्वपूर्ण बनी हुई है। बड़े पैमाने पर रकबा होने के बावजूद, इस बार मेंथा की जड़ के दाम आसमान छू रहे हैं, जिससे जड़ बेचने वाले किसानों में खुशी की लहर है। जिन किसानों ने जड़ की बुवाई की है, वे बढ़े दामों से मालामाल हो रहे हैं, जबकि जड़ न लगाने वाले किसान इसे ऊंचे दामों पर खरीदने को मजबूर हैं।
सिरौलीगौसपुर तहसील क्षेत्र के किसान, जो बड़े पैमाने पर मेंथा की खेती करते हैं, इसे एक नकदी फसल मानते हैं। सरसों, गेहूं, आलू जैसी फसलों की कटाई के बाद और धान की रोपाई से पहले यह फसल तैयार हो जाती है। इस समय मेंथा की जड़, जो बीज का काम करती है, की बिक्री शुरू हो गई है और इसके दाम अप्रत्याशित रूप से बढ़ गए हैं। टिकैतनगर, सैदखानपुर, बदोसराय और मरकामऊ जैसे बाजारों में मेंथा की जड़ 80 रुपये से लेकर 110 रुपये प्रति किलो तक बिक रही है। किसानों की पहली पसंद शिव उन्नति प्रजाति 100 से 110 रुपये प्रति किलो तक बिक रही है, जबकि पंजाब कोल्ड 80 रुपये और कोसी 85 रुपये प्रति किलो के भाव से बेची जा रही है।
मेंथा की जड़ की खेती करने वाले किसान अवधेश कुमार और धर्मेंद्र यादव ने बताया कि इस बार जड़ का भाव बहुत अच्छा है, जिससे उन्हें सीधे जड़ की बिक्री से ही उतना मुनाफा हो रहा है, जितना पहले मेंथा तेल से मिलता था। खरीदार किसान राजेश, सुनील, रामजस और हरीश कुमार ने भी स्वीकार किया कि इस सीजन में जड़ के दाम अभूतपूर्व हैं।