देवा (बाराबंकी)। देवा मेला महोत्सव के सांस्कृतिक मंच पर बृहस्पतिवार को देश के नामचीन कवियों ने अपनी शानदार प्रस्तुतियों से पंडाल में मौजूद श्रोताओं को तालियां बजाने पर विवश कर दिया। प्रसिद्ध कवि विष्णु सक्सेना ने रेत पर नाम लिखने से क्या फायदा, एक आई लहर कुछ बचेगा नहीं, तुमने पत्थर का दिल हमको दिया, पत्थरों पर लिखोगे मिटेगा नहीं पढ़कर धूम मचा मचा दी। देर रात तक कवियों ने अपनी ओजस्वी कविताओं की चुटीली प्रस्तुति देकर सभी को जमकर गुदगुदाया।
अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का शुभारंभ एससी-एसटी आयोग के अध्यक्ष बैजनाथ रावत ने की। इसके बाद कवियों का स्मृति चिन्ह देकर उनका स्वागत किया गया। छत्तीसगढ़ से आए पद्मश्री डॉ. सुरेंद्र दुबे ने जहां तेरा वजूद किस्तों में बिकता है, बावला है रे जो कविता लिखता है, जैसी चुटीले व्यंग से ओतप्रोत कविताएं प्रस्तुत कर समां बांध दिया।
लखनऊ से आई शशि श्रेया कवियत्री ने पढ़ा कि नफरतों ने तो यहां सरहदें उठाई हैं, प्रेम ही आदमी को आदमी बनाता है। जयपुर से आए अशोक चारण ने कवियों ऋषियों मुनियों की तपोस्थली ईश्वर के वरदान की, लाखों स्वर्गों से सुंदर है धरती हिंदुस्तान की, ये धरती हिंदुस्तान की।
हर एक दिल में राम बसे हैं, बहती पावन गंगा है कविता प्रस्तुत कर देशभक्ति की बयार बहाई। अंबेडकर नगर के अभय सिंह निर्भीक ने सैनिकों का परिचय देते हुए कहा कि सीना ताने स्वाभिमान से सीमाओं पर हम रहते हैं। खाकी वर्दी के बेटों की सच्चाई भी सुन लेना, प्रश्न उठाने से पहले तुम उनकी पीड़ा सुन लेना।
बलिया से आए नंद जी नंदा ने जगत नियंता जग अभियंता का वंदन है, संत सुरमा राष्ट्र भक्त राष्ट्र रत्न हैं पढ़ा। रायबरेली के नीरज पांडेय ने साथ निभाती जहां आरती का है सदा अजान की मुश्तर्का, तहजीब रही है अहले हिंदुस्तान की सांप्रदायिक एकता की मिसाल पेश की। मैनपुरी के हास्य कवि विनोद राजयोगी ने पढ़ा कि धरती फटी आसमां टूटा, दोनों खड़े निकम्मा से, कीका खून मिल मिला था।
आशीष आनंद बाराबंकी ने पढ़ा कि बेशक हम इससे मिलते हैं, पर तस्वीर नहीं लेते बात बात पर लड़ते हैं, हम कलयुग के आशिक है हम उड़ते तीर नहीं लेते हैं। जबलपुर मध्य प्रदेश से आई कवियत्री मनिका दूबे ने शहर के शोर में तनहाइयां है यहां तुम हो मगर वीरानियां है इसी के साथ तमाम कवियों ने अपनी प्रस्तुतियां दीं। कार्यक्रम का संयोजन डॉ. अंबरीश अंबर एवं संचालक आशीष पाठक ने किया।