बाराबंकी/सतरिख। लंपी वायरस के बढ़ते प्रकोप के बीच निजी पशु चिकित्सकों और झोलाछाप की चांदी हो गई है। वे इलाज के नाम पर मवेशियों को इंजेक्शन और दवाओं की लंबी चौड़ी डोज देकर दो से तीन हजार रुपये का बिल बना रहे हैं। पशुपालन विभाग की टीमों के समय से न पहुंचने के कारण पशुपालकों को मजबूरन हजारों रुपये का खर्च उठाना पड़ रहा है।
हरख ब्लॉक की ग्राम पंचायत करौंदीखुर्द, करौंदी कला, अलीपुर, रहमलीपुर, जैनाबाद, नेवली शेखनपुर, पिपरहा आदि गांवों में लंपी वायरस का प्रकोप तेजी के साथ बढ़ रहा है। बनीकोडर, हैदरगढ़, त्रिवेदीगंज, सूरतगंज, रामनगर समेत सभी ब्लॉकों में मवेशी लंपी वायरस का शिकार होकर बीमार हो रहे हैं। ग्रामीण पीड़ित मवेशियों का इलाज कराने के लिए पशुपालन विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों से संपर्क कर रहे हैं, लेकिन समय से टीमें नहीं पहुंच पा रही हैं। ऐसे में ग्रामीणों को इलाज के लिए निजी पशु चिकित्सकों व झोलाछाप का सहारा लेना पड़ रहा है।
हरख के नेवली निवासी अशोक बाबा ने बताया कि उनकी गाय लंपी वायरस का शिकार है। सूचना देने के बाद भी टीम नहीं पहुंची तो निजी चिकित्सक से इलाज कराना पड़ा। दवाइयों और इंजेक्शन के नाम पर करीब 3500 रुपये खर्च हो चुके हैं। हैदरगढ़ के बेहटा गांव के संदीप ने बताया कि सूचना के बाद भी कोई टीम नहीं पहुंची। खैरही गांव के बहादुर पाल के तीन मवेशी लंपी के शिकार हैं, यहां भी कोई टीम नहीं पहुंची।
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265 मवेशी लंपी से बीमार, 85700 का टीकाकरण
जिले में 265 मवेशी अब तक लंपी वायरस का शिकार हो चुके हैं। रविवार को पशु चिकित्सा अधिकारियाें की टीमों ने गांव-गांव भ्रमण कर 2400 मवेशियों का टीकाकरण किया। अब तक 85700 मवेशियों का टीकाकरण किया जा चुका है। वहीं सर्विलांस एवं टीकाकरण टीमों ने गांव-गांव भ्रमण कर टीका लगाने के साथ संक्रमित मवेशियों की गांठ के नमूने एकत्रित किए। सीवीओ डॉ. धर्मेंद्र पांडेय ने बताया कि सर्विलांस टीमें निगरानी कर रही हैं। जहां सेे फोन आ रहे हैं, वहां टीमें भेजकर इलाज कराया जा रहा है।