जनपद अपने आंचल में कई पर्यटन व पौराणिक धरोहर समेटे है। यहां देश-विदेश से सैलानी आते रहते हैं। इन सैलानियों को देवा, महादेवा व पारिजात धाम और भगहर झील की उपेक्षा अखरती है। इसके बाद भी इन पर्यटन व पौराणिक स्थलों का आकर्षण कम नहीं है। अब शासन की नई पर्यटन नीति से इन पर्यटन स्थलों के दिन बहुरने की उम्मीद जगी है।
शासन ने नई पर्यटन नीति-2016 घोषित कर दी है। इसके तहत उद्योगों को मिलने वाली सभी सुविधाएं पर्यटन को भी उपलब्ध कराई जाएंगी। नीति के तहत शहरों में कहीं भी होटल खोलने की अनुमति होगी। पिछड़े इलाकों में पर्यटन उद्योग को विकसित करने के लिए स्थानीय जन समुदायों को प्रशिक्षित किया जाएगा। ये नीति अगले पांच साल तक प्रभावी रहेगी। इसके अनुसार पर्यटन स्थलों पर विश्वस्तरीय सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी।
हॉप ऑन तथा हॉप ऑफ जैसी विशेष पर्यटन बस सेवाएं भी संचालित होंगी। विरासत विकास कोष और पर्यटन प्रोत्साहन का गठन होगा। पर्यटन उद्योग से जुड़ी समस्याएं दूर करने के लिए एकल मेज प्रणाली की व्यवस्था होगी। पर्यटकों की सहायता के लिए पर्यटक हेल्पलाइन की स्थापना होगी, इसमें प्रमुख विदेशी भाषाओं में भी बातचीत की सुविधा होगी।
नीति के तहत वैकल्पिक पर्यटन के विकास, ईको और वाइल्ड लाइफ, साहसिक, सांस्कृतिक, क्राफ्ट पर्यटन को बढ़ावा दिया जाएगा। थीम पार्क, एम्यूजमेंट पार्क और वाटर पार्क को बढ़ावा देने के लिए मनोरंजन कर और लग्जरी टैक्स की पांच वर्ष के लिए छूट दी जाएगी।