बच्चों को आधार से जोड़ने में बरती गई लापरवाही अब विभाग को ही भारी पड़ने जा रही है। निर्धारित तिथि तक यदि कार्य को पूरा करना है तो प्रतिदिन करीब 11 हजार बच्चों के आधार बनाने होंगे जो कि संभव नहीं दिख रहा है।
वहीं इसके लिए अभिभावक भी कम दोषी नहीं है यदि अभिभावकों ने इसे गंभीरता से लिया होता तो अब तक ज्यादा से ज्यादा बच्चों के आधार बना दिए गए होते। अब जब समय पूरा होने को है तो विभाग की भी नींद टूटी है।
जिले में 5 आयु वर्ष के करीब 3 लाख 34 हजार बच्चे हैं इन सभी बच्चों का आधार कार्ड 15 मार्च 2016 तक हर हाल में बना दिया जाना है। लेकिन अभी तक महज 72 हजार बच्चों के ही आधार कार्ड बनाए जा सके हैं।
अभिभावक इसमें रुचि नहीं दिखा रहे हैं जिससे विभागीय अधिकारियों की नींद उड़ गई है क्योंकि सबसे ज्यादा दबाव उन्हीं पर है। 23 दिन के अंदर करीब 2 लाख 62 हजार बच्चों को आधार से जोड़ना है जो निर्धारित समय में पूरा हो पाना संभव नहीं दिख रहा है।
यदि निर्धारित समय तक कार्य पूरा करना है तो प्रतिदिन करीब 11 हजार बच्चों के आधार बनाने होंगे जो कि किसी भी हाल में नहीं हो पाएगा। बतातें चले कि बच्चों को आधार से जोड़ने की प्रक्रिया नवंबर 2015 में शुरू हुई थी लेकिन उस समय यदि विभाग ने गंभीरता दिखाई होती तो अब तक लाखों बच्चों को आधार से जोड़ दिया गया होता।