घाघरा का पानी भले ही ठहर गया हो, लेकिन अभी भी खतरे के निशान से ऊपर बह रहा है। नदी के जलस्तर में ठहराव से प्रशासन ने राहत की सांस ली है। प्रशासन ने बाढ़ चौकियों पर तैनात कर्मचारियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।
घाघरा नदी का पानी खतरे के निशान 106.076 से ऊपर 106.376 पर बह रहा है। नदी का पानी इतने पर ही ठहर गया है।
नदी के जलस्तर में आए ठहराव से प्रशासन ने राहत की सांस ली है, लेकिन कटान को लेकर खतरा अभी टला नहीं है इसलिए बाढ़ चौकियों पर तैनात कर्मचारियों को मुस्तैद रहने के निर्देेश दिए गए हैं। यहां के लोगों का कहना है घाघरा का पानी स्थिर हुआ है। इसलिए अभी कटान नहीं हो रही है।
जैसे ही पानी घटना शुरू होगा वैसे ही कटान शुरू हो जाएगी। नदी का पानी एल्गिन-चरसड़ी तटबंध के निकट सबसे ज्यादा कटान करती है। इसलिए बाढ़ खंड के अधिकारियों से स्थिति पर बराबर नजर रखने के निर्देेश दिए गए हैं।
अभी कुछ दिन पूर्व नदी का पानी तटबंध को क्षतिग्रस्त कर चुका है। बांध को बचाने के लिए बाढ़ खंड के अधिकारियों केे कड़ी मशक्कत करनी पड़ी थी। कटान बंद होने के बाद बांध को बचाने के लिए एक दूसरा बांध बनाया गया है। इस बांध को बनाए जाने की वजह से बाढ़ की चपेट में आने वाले वह गांव भी सुरक्षित हो गए हैं।
इस बाबत अपर जिलाधिकारी हरिकेश चौरसिया का कहना है कि नदी का पानी स्थिर हो गया है, लेकिन नदी अभी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। बाढ़ चौकियों पर तैनात कर्मचारियों को मुस्तैद रहने के निर्देश दिए गए हैं।