मार्केटिंग स्टाफ की हड़ताल भले ही समाप्त हो गई हो लेकिन धान की खरीद अभी तक शुरू नहीं की जा सकी है जिससे धान की तौल कराने के लिए किसान इधर-उधर धक्के खा रहे हैं। इसका लाभ एक बार फिर बिचौलिए उठाने में लग गए हैं।
मार्केटिंग स्टाफ की हड़ताल के चलते पिछले एक सप्ताह से धान खरीद जिले भर में पूरी तरह से ठप पड़ी है जिसके चलते किसानों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। दो माह के अंदर जिले में अब तक 27 हजार 8 सौ क्विंटल धान की खरीद की जा सकी है। इसके बाद यानि 26 दिसंबर से धान खरीद ठप है। इससे किसानों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इसका लाभ एक बार फिर बिचौलिए उठाने में लग गए हैं और किसानों का धान घोषित समर्थन मूल्य 1410 रुपये के बजाए औने-पौने दामों पर खरीद रहे हैं जबकि मार्केटिंग स्टाफ की हड़ताल शनिवार को समाप्त हो चुकी है इसके बाद भी क्रय केंद्रों से धान की तौल शुरू नहीं कराई गई।
किसानों का कहना है कि जब हड़ताल समाप्त हो गई है तो फिर धान की तौल क्रय केंद्रों से क्यों नहीं कराई जा रही है। धान की तौल न होने से किसान खासे परेशान है और अपना उत्पाद बिचौलियों के हाथों औने-पौने दामों पर बेचने को मजबूर हैं। किसानों ने कहा कि विपणन विभाग के अधिकारी सिर्फ साथियों को बचाने के चक्कर में किसानों का नुकसान कर रहे हैं।