कोटवाधाम। मौसम साफ होने के बावजूद मरम्मत कार्य में बरती गई लापरवाही का खामिजाया 65 गांवों के बिजली उपभोक्ताओं को उठाना पड़ा। इंसुलेटर पंचर हो जाने के कारण इन गांवों में 18 घंटे तक बिजली न आने से करीब दो लाख से ज्यादा आबादी ने बिजली के साथ पेयजल संकट की दोहरी परेशानी झेली।
शुक्रवार को शाम छह बजे रामसनेहीघाट से आई मुख्य लाइन पर ब्रेक डाउन हो जाने से इलाके की बिजली सप्लाई व्यवस्था पटरी से उतर गई। इससे कोटवाधाम, अमनियापुर, रानीकटरा, तासीपुर समेत 65 गांव रात भर अंधेरे में रहे। क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि जब इसकी शिकायत के लिए बिजली निगम के कर्मचारियों को फोन किया गया तो किसी ने फोन तक नही उठाया। बिजली न आने से लोगों को उमस भरी गर्मी में पूरी रात जागकर काटना पड़ी। इसके बाद शनिवार सुबह पंप न चलने से बाधित हुई पेयजल आपूर्ति के कारण उन्हें दोहरी मुसीबत उठाना पड़ी।
इससे आक्रोशित ग्रामीणों ने बिजली उपकेंद्र पर जुटना शुरू कर दिया। इस बीच उपभोक्ताओं आक्रोशित हाेने की जानकारी के बाद पहुंचे बिजली निगम के कर्मचारियों ने लाइन फॉल्ट की खोजबीन शुरू की। जांच में सप्लाई लाइन के छह इंसुलेटर पंचर मिले, जिसे दुरुस्त करने में शनिवार दोपहर 12 बजे तक का समय लग गया। एसडीओ राजवीर सिंह ने बताया कि छह इंसुलेटर पंचर होने से समस्या आई थी। दोपहर बाद इंसुलेटर बदल कर इलाके की बिजली आपूर्ति को सुचारू बनाया गया।