बाराबंकी। जिन हाथों में खेतों की मिट्टी जांचने, चौपालों में खाद-बीज की सलाह देने और सरकारी योजनाओं को किसानों के दरवाजे तक पहुंचाने की जिम्मेदारी थी, वह कई वर्षों से उप कृषि निदेशक कार्यालय की कुर्सियों पर जमे हैं। दफ्तर में आठ-आठ बाबुओं की तैनाती के बाद भी चार चहेते कृषि तकनीकी सहायकों को मूल काम से इतर दफ्तर में संबद्ध किया गया है। नतीजा यह है कि खेत में जाकर काम करने की जगह यह तकनीकी सहायक कार्यालय में बैठकर वेतन पा रहे हैं। दूसरी तरफ कृषि कार्यों से जुड़ी योजनाओं की जानकारी न मिल पाने से गांव के किसान भटक रहे हैं।
करीब दो साल पहले भूमि अंकन के काम का बहाना बनाकर इन सहायकों को कार्यालय से संबद्ध किया गया था। जब भूमि अंकन का कार्य निपटा, तो फार्मर रजिस्ट्री के काम को ढाल बना कर यह चारों कार्यालय में ही जमे रहे। अब फार्मर रजिस्ट्री का काम भी खत्म हो जाने के बावजूद इन्हें मूल तैनाती के तहत फील्ड कार्य के लिए नहीं भेजा गया है। जबकि कार्यालय में पीएम श्री के लिए अलग से कंप्यूटर ऑपरेटर भी मौजूद है। साथ ही नए बाबुओं की तैनाती भी हो चुकी है, फिर भी लाखों रुपये का वेतन पाने वाले इन सहायकों को मूल तैनाती पर नहीं भेजा जा रहा है। अब उप कृषि निदेशक उमेश कुमार यह कहते हुए बचाव कर रहे हैं कि पीएम श्री योजना व अन्य जरूरी विभागीय कार्यों की अधिकता के कारण इनको कार्यालय से संबद्ध कर काम लिया जा रहा है। किसी योजना का काम रुकने नहीं दिया जाएगा। ( संवाद)