सिरौलीगौसपुर (बाराबंकी)। संयुक्त चिकित्सालय में महिला डॉक्टर का एक दिन का वेतन काटे जाने की बात सुनकर डॉक्टर भड़क गए और ओपीडी बंद कर दी। सीएमएस से वार्ता के बाद ओपीडी शुरू हुई। इस दौरान मरीज कतार में खड़े रहे। करीब 40 मिनट ओपीडी बंद रही। इससे मरीजों को परेशानी हुई।
100 बेड वाले संयुक्त चिकित्सालय सिरौलीगौसपुर में प्रधानमंत्री मातृत्व योजना माह की 1, 9, 16 और 26 तारीख में चलाई जाती है, जिसमें गर्भवती महिलाओं का मेडिकोलीगल टेस्ट किया जाता है। पिछले दिनों सीएमएस डॉ. नीलम गुप्ता ने डॉ. तथीर फातिमा से मेडिकोलीगल टेस्ट किए जाने की बात कही। टेस्ट करने से मना किए जाने से नाराज सीएमएस ने एक दिन का वेतन काटे जाने के निर्देश दिए। सोमवार को वेतन काटे जाने से नाराज सभी डॉक्टरों ने लामबंद होकर ओपीडी बंद कर दी।
इसकी जानकारी मिलने पर सीएमएस ने डॉक्टरों को वार्ता के लिए अपने कक्ष में बुलाया। करीब 30 मिनट तक वार्ता चली। इस दौरान अस्पताल के सभी डॉक्टर मांग कर रहे थे कि सीएचसी की कुछ महिला डॉक्टर ड्यूटी करने नहीं आती हैं। फिर भी उनका वेतन नहीं रोका जाता है। इसके बाद 11:40 बजे पुनः ओपीडी शुरू हुई तो मरीजों ने राहत की सांस ली। यहां के अधीक्षक डॉ. नीरज वर्मा ने बताया कि वेतन काटने के मामले में डॉक्टर भड़क गए थे, जिससे थोड़ी देर के लिए ओपीडी बाधित रही।
इसके बाद ओपीडी में करीब 400 मरीज देखे गए। सीएमएस डॉ. नीलम गुप्ता ने बताया कि सीएचसी की डॉक्टर अलका व दीपिका मातृत्व योजना में ड्यूटी करने नहीं आती हैं। जब मेडिकोलीगल टेस्ट के लिए यहां की महिला डॉक्टर तथीरा से कहा तो उन्होंने मना कर दिया, जिस पर एक दिन का वेतन काटे जाने की बात पर डॉक्टर लामबंद हो गए।