बाराबंकी। किसान सम्मान निधि के सत्यापन में जिले में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां सामने आ रही हैं। शासन के आदेश पर चलाए जा रहे सतत सत्यापन अभियान में करीब 35 हजार किसान अपात्र पाए गए हैं। इनमें 7 हजार लाभार्थी भूमिहीन भी हैं जो योजना का लाभ लेते पाए गए। कुछ ऐसे मामले हैं, जिनमें पति-पत्नी दोनों योजना का लाभ ले रहे थे।
अधिकारियों का कहना है कि सत्यापन रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है। वहां से जो निर्देश मिलेंगे उसी हिसाब से कार्रवाई होगी। अधिकारियों के मुताबिक अपात्र लोगों के नाम हटने के बाद करीब 4500 नए किसानों को योजना के दायरे में लाया जाएगा। इसकी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। किसानों को सम्मान निधि के तौर पर पहली बार वर्ष 2018 में जिले के 5.78 लाख किसानों को किसान सम्मान निधि की पहली किस्त मिली थी।
इसमें किसानों को एक साल में छह हजार रुपया तीन किस्तों में मिलता है। हाल ही में 20वीं किस्त 4.41 लाख किसानों के खातों में भेजी गई है। 1.36 लाख से ज्यादा किसानों की सम्मान निधि रोकी गई। बाद में इनका सत्यापन कराया गया तो पता चला था कि इनमें कई आयकरदाता थे और कई नाबालिग। इस पर इनका नाम पोर्टल से हटाया दिया गया है। शासन के आदेश पर फिर सत्यापन कराया गया तो पता चला कि आठ हजार सेे अधिक पति-पत्नी दोनों योजना का लाभ ले रहे हैं। दो हजार से ज्यादा दोहरे खाते के जरिये लाभ लेने वाले मिले हैं। 7 हजार किसान ऐसे मिले जो भूमिहीन हैं या भूमि थी और बाद में बेच दी। इस प्रकार से करीब 35 हजार किसान सत्यापन में अपात्र पाए गए हैं।