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Barabanki News: कोचिंग नहीं...अनुशासन बनाता है टॉपर, सोशल मीडिया सबसे बड़ी बाधा

Sat, 25 Apr 2026 02:11 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
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बाराबंकी। यूपी बोर्ड की हाईस्कूल परीक्षा में पहला, दूसरा व तीसरा स्थान पाने वाली तीनों टॉपर्स ने अपनी सफलता की चमक के पीछे का सच उजागर किया है। यह सच है न कोचिंग, न शॉर्टकट... सिर्फ मेहनत, अनुशासन और सोशल मीडिया से दूरी। संवाद न्यूज एजेंसी से खास बातचीत में प्रदेश की टॉप-थ्री छात्राओं ने न सिर्फ अपनी सफलता का राज खोला, बल्कि शिक्षा व्यवस्था पर भी सीधी चोट की।
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अंशिका की बेबाकी...सरकारी स्कूलों में सुधार हो
प्रदेश में पहला स्थान हासिल करने वाली मॉडर्न एकेडमी इंटर कॉलेज की छात्रा अंशिका वर्मा ने साफ शब्दों में कहा कि टॉप करने का कोई शॉर्टकट नहीं होता। अगर छात्र शिक्षक की बातों को गंभीरता से समझें और खुद पर भरोसा रखें, तो बिना कोचिंग के भी नंबर एक बना जा सकता है।
अंशिका ने शिक्षा व्यवस्था पर भी बेबाक राय रखी। कहा कि सरकारी स्कूलों की स्थिति में सुधार बेहद जरूरी है, ताकि वहां पढ़ने वाले छात्रों को भी बेहतर माहौल और संसाधन मिल सकें। उन्होंने बताया कि मेरिट में आने का लक्ष्य था, लेकिन प्रदेश में पहला स्थान मिलेगा यह नहीं सोचा था।
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मोबाइल का समय किताबों को दीजिए...
प्रदेश में दूसरा स्थान पाने वाली अदिति ने सीधे तौर पर सोशल मीडिया को स्टूडेंट्स का सबसे बड़ा दुश्मन करार दिया। उन्होंने कहा कि आज का छात्र जितना समय मोबाइल स्क्रीन पर खर्च करता है, उतना किताबों को दे दे, तो रिजल्ट खुद बोलने लगेंगे। अदिति ने कहा कि घंटों बैठना जरूरी नहीं, सही तरीके से पढ़ना जरूरी है।
रोजाना चार से पांच घंटे की ईमानदारी से पढ़ाई ही सफलता की असली कुंजी है। उन्होंने छात्रों को सलाह दी कि वे खुद से सवाल करें कि क्या वे अपनी तैयारी से संतुष्ट हैं...? यही सवाल उन्हें आगे बढ़ाएगा।


कम पढ़ो, लेकिन समझकर पढ़ो : परी
बहुत प्रदेश में 10वीं में तीसरे स्थान पर रहीं परी वर्मा ने शिक्षा को हर समस्या का सबसे मजबूत समाधान बताया। उन्होंने कहा कि टॉपर बनने की उम्मीद नहीं थी, लेकिन लगातार मेहनत और शिक्षकों के मार्गदर्शन ने उनकी किस्मत बदल दी। परी का फोकस साफ था कि कम पढ़ो, लेकिन समझकर पढ़ो।
वह रोजाना चार से पांच घंटे पढ़ाई करती थीं और कोशिश रहती थी कि जो भी पढ़ें, उसे पूरी तरह आत्मसात करें। उनके अनुसार अगर इरादे मजबूत हों, तो संसाधनों की कमी भी रास्ता नहीं रोक सकती।
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