साइकिल से गिरकर घायल हुए एक मासूम को शुक्रवार को सीएचसी बड़ागांव से जिला अस्पताल रेफर किया गया था। यहां पर बच्चे को भर्ती तो कर लिया, लेकिन किसी ने रात भर हाथ नहीं लगाया। इलाज न मिलने से मासूम रात भर दर्द से तड़पता रहा। सुबह परिवारीजनों ने विरोध शुरू किया तो आनन-फानन में नई भर्ती फाइल तैयार कर उसे ट्रॉमा सेंटर रेफर कर दिया गया। चिकित्सकों ने देखा तो बताया कि आंत में गहरा घाव होने से पेट के में रक्त जमा हो गया है। स्टाफ की इस लापरवाही से बच्चे की जान पर बन सकती थी।
मसौली थाना क्षेत्र के ज्योरी गांव निवासी जितेंद्र कुमार रावत का पुत्र आदित्य (9) साइकिल चलाते समय गिर गया, जिससे उसके पेट में चोट लग गई थी। तेज दर्द होने पर उसे सीएचसी बड़ागांव में भर्ती कराया गया था। जहां से शुक्रवार को बच्चे को जिला अस्पताल रेफर किया गया था। यहां पर डॉ. रोहित गुप्ता ने बच्चे का इलाज कर उसे नई बिल्डिंग के चिल्ड्रेन वार्ड में भर्ती कराने के लिए फाइल तैयार कर भेजा था।
मरीज के पिता का आरोप है कि वार्ड में एक बेड पर पहले से एक बच्चा भर्ती था, उसी बेड पर लिटा दिया। अचानक बच्चे के पेट में तेज दर्द शुुरू होने पर न तो कोई दवाई दी गई और न ही उसे कोई देखने आया। बच्चा सारी रात पेट दर्द से तड़पता रहा।
शनिवार को सुबह राउंड पर गए डॉ. एम. पांडेय ने बच्चे की फाइल देेखने के लिए मांगी तो स्टाफ ने कहा कि फाइल खो गई है। फाइल खोने की सूचना स्टाफ ने न तो सर्जन को दी और न ही नई फाइल बनाकर इलाज कराया। स्टाफ नर्सों की यह लापरवाही बच्चे के लिए जानलेवा साबित हो सकती थी। पीड़ित ने मामले की शिकायत सीएमओ से की है।
शनिवार को सुबह आदित्य को दर्द और तेज होने पर पिता ने उसे डॉ. एसके सिंह को दिखाया। चिकित्सक ने बच्चे की जांच कराई। जांच में पता चला कि उसकी आंत चोटिल होने से पेट में ब्लॅड के थक्के के साथ पानी जमा है। आनकॉल आए सर्जन डॉ. एसबी सिंह व डॉ. अजय सिंह ने बच्चे को ट्रॉमा सेंटर रेफर कर दिया।
सीएमओ डॉ. रमेश चंद्र ने कहा कि भर्ती फाइल खोने के बाद नई फाइल तैयार कर बच्चे का इलाज किया जाना था। सारी रात बच्चा बिना इलाज के तड़पता रहा, यह तो लापरवाही है। मामले की जांच कराई जाएगी। जिसकी लापरवाही मिलेगी, उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।