देवा (बाराबंकी)। ऐतिहासिक देवा महोत्सव का बृहस्पतिवार को आगाज हो गया। शहनाई की मधुर धुन के बीच जिलाधिकारी अविनाश कुमार की धर्मपत्नी प्रीति सिंह ने शाम करीब साढ़े चार बजे शेख मोहम्मद हसन द्वार पर फीता काटकर मेले का उद्घाटन किया। गुब्बारे व शांति के प्रतीक सफेद कबूतर उड़ाए गए। 10 दिवसीय देवा मेला 22 अक्टूबर तक चलेगा।
गेरुवे रंग से सजी धरती, रंगबिरंगी झालरों से सजे उद्घाटन स्थल पर सूफियाना वातावरण में मेले का उद्घाटन किया गया। इसके बाद अधिकारी, अतिथि व मेला कमेटी के पदाधिकारी व सदस्य बैंडबाजे व नगाड़ों के साथ मेला परिसर में ही बनाए गए कमेटी के कार्यालय पहुंचे। यहां से जुलूस सूफी संत हाजी वारिस अली शाह के वालिद दादा मिंया की दरगाह पर पहुंचा।
यहां चादरपोशी करने के बाद सभी लोग हाजी वारिस अली शाह की दरगाह पर पहुंचे और यहां भी चादर पेश की गई। इस मौके पर डीएम अविनाश कुमार, मेला सचिव एडीएम राकेश कुमार सिंह, रायरेश्वर बली, कीर्तिवर्धन सिंह, हारुन वारसी समेत कई अधिकारी व मेला कमेटी के पदाधिकारी मौजूद रहे।
छाप तिलक सब छोनी मोसे...
देवा। ऑडिटोरियम की शाम सूफी कव्वालीयों के नाम रही। छाप तिलक सब छीनी मोसे नैना मिलाइके... से लेकर दमादम मस्त कलंदर... कव्वाली ने लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। हारमोनियम और तबले की थाप पर झूमकर गाए कव्वालियों को सुनकर श्रोता झूम उठे। पूरा पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंजता रहा। देवा महोत्सव की पहली शाम सूफी कव्वालियों के नाम रही।
कार्यक्रम की शुरुआत कव्वाल अजीज इकबाल की कव्वाली छाप तिलक सब छीनी तोसे नैना मिलाइके के... से हुई। इसके बाद अफसान हुसैन वारसी कव्वाल ने दमादम मस्त कलंदर, अली का पहला नंबर... गाकर समां बांध दिया। इसके बाद इश्क में जिंदगी का मजा मिल गया... गाकर खूब वाहवाही बटोरी।
रामपुर जिले से आए कव्वाल दानिश मोनिस ने मोला अली, मोला अली, मोला अली, मोला अली... गाकर समा बांध दिया। उनकी कव्वाली तुम्हें दिल्लगी भूल जानी पड़ेगी, मोहब्बत से नजरे मिला के... तो देखो गाकर लोगों को झूमने पर मजबूर कर दिया।