बाराबंकी। कोरोना के कहर के बाद जिले में शहर से लेकर गांव तक डेंगू बेकाबू होता जा रहा है। संचारी रोगों से निपटने के लिए आधा दर्जन विभागों के जिम्मेदार कहीं दिखाई नही पड़ रहे।
तीन मौतों की पुष्टि और दर्जनों पीड़ित मरीजों की खबर के बाद स्वास्थ्य विभाग जरूर जागा। बुधवार को सुमेरगंज क्षेत्र के तीन गांवों में एसीएमओ पूरी टीम के साथ पहुंचे फॉगिंग कराई और पीड़ितों को दवाएं बांटी। इसके अलावा शहर के लखपेड़ाबाग में छह और रामसनेहीघाट क्षेत्र के गांवों में 18 नए डेंगू पीड़ित मरीज सामने आए हैं।
जिले में डेंगू की एलाइजा जांच का कोई इंतजाम नहीं है ऐसे में निजी पैथालॉजी डेंगू की जांच के नाम पर मनमानी वसूली कर रही हैं। गंभीर मरीजों को लखनऊ ही जाना पड़ रहा है। यह हालात होने के बाद भी जिला अस्पताल और नगर पालिका में कई स्थानों पर मच्छरों की नर्सरी लार्वा पैदा कर डेंगू को दावत दे रही है।
जिले में डेंगू जान लेवा बनता जा रहा है। चार दिन के भीतर तीन लोगों की मौत हो चुकी है और सैकड़ों पीड़ित हैं। इसके अलावा दर्जनों की जांच में डेंगू की पुष्टि हुई है जिनका इलाज लखनऊ के कई अस्पतालों में चल रहा है।
शहर के लखपेड़ाबाग निवारी राम प्रकाश, कमल किशोर, कमला रानी, मीरा देवी, कौशल किशोर और देव कुमार पिछले कई दिनों से बुखार से पीड़ित थे। जांच में डेंगू की पुष्टि होने के बाद परिवारीजनों ने सभी को उपचार के लिए लखनऊ के निजी अस्पतालों में भर्ती कराया है।
इसी प्रकार रामसनेहीघाट का धरौली, सुमेरगंज, भिटरिया गांव भी डेेंगू की चपेट में आ गया है। यहां के निवासी पप्पू, रामलाल, श्यामू, दुर्गेश, अमित कुमार, हरिशचन्द्र, अभिषेक, पवन, भीम, राजन, गोलू, गया प्रसाद, किरन देवी, मीना देवी, सोनापति समेत करीब 18 लोग पिछले एक सप्ताह से बुखार से पीड़ित थे। लेकिन हालत में सुधार नहीं होने पर परिवारीजनों ने लखनऊ के अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया जांच में डेंगू की पुष्टि होने के बाद सभी को भर्ती कर उपचार किया जा रहा है।
अमर उजाला में आज डेंगू से मौतों की खबर के बाद एसीएमओ डॉ.एके श्रीवास्तव और सीएचसी प्रभारी अमित तिवारी पूरी टीम के साथ सुमेरगंज क्षेत्र के पीड़ित गांवों में सफाई और फॉगिंग कराई तथा मरीजों को दवाएं भी बांटीं। शहर में कोई जिम्मेदार नही पहुंचा। पर जिला अस्पताल में डेंगू वार्ड बनाने की तैयारियां शुरू कर दी गईं। मरीजों को मच्छरदानी व अन्य चीजें वार्ड में उपलब्ध कराने के लिए स्वास्थ्य कर्मी जुटे हुए थे।
सफाई और दवाई से लेकर संचारी रोगों से निपटने वाले महत्वपूर्ण विभाग में ही लापरवाही चरम पर है। जिला अस्पताल में जगह-जगह भरे पानी में मच्छरों का डेरा है। लार्वा डेंगू को दावत दे रहा है। इलाज कराने वाले मरीज होशियार रहें। कहीं ऐसा ना हो एक बीमारी से निजात ना मिल पाए और दूसरी जकड़ ले। यही हाल नगर पालिका का है। नगर पालिका परिसर में बेकार पड़े टैंक व कूड़े दानों में बारिश का पानी इकट्ठा होने की वजह से लार्वा पनप रहा है।
पैथालॉजी प्रभारी डॉ. एसके शुक्ल बताते हैं कि दो तीन दिनों तक लगातार बुखार आने पर डेंगू की जांच किट से की जाती है जांच में पॉजिटिव पाए जाने के बाद एलाइजा की जांच की सलाह दी जाती है। क्योंकि सीएचसी से लेकर जिला अस्पताल तक एलाइजा टेस्ट की कोई व्यवस्था नहीं है। जबकि शासन ने डेंगू की पुष्टि के लिए इस जांच को ही प्रमाणिक माना है। लेकिन पीसीआर और कल्चरल वायरल टेस्ट भी डेंगू की जांच को किए जा सकते हैं।
हालांकि इसकी जरूरत बहुत कम पड़ती है। जबकि निजी पैथालाजियों में डेंगू की जांच के नाम पर 15 सौ रुपये की अवैध वसूली की जा रही है। सरकारी अस्पतालों की इसकी व्यवस्था न होने के कारण लोग मजबूरी में यह जांच करा रहे हैं। वहीं डेंगू से निपटने के लिए जिला अस्पताल में एक कक्ष बनाकर महज औपचारिकता ही निभाई जा रही है।
डेंगू की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग के अलावा नगर पालिका, नगर पंचायत, पंचायती राज, शिक्षा आदि विभागों की भी जिम्मेदारी होती है कि वह अपनी दायित्वों का निवर्हन पूरी ईमानदारी से करें लेकिन जिले में शहर से लेकर गांव तक ऐसा होता दिखाई नहीं दे रहा है। सिर्फ स्वास्थ्य विभाग की जानकारी मिलने पर चिकित्सकों की टीमों को भेजकर उपचार कर दवाएं वितरित कर रहा है बाकी विभाग आंखें बंद किए हुए हैं।