सिंचाई विभाग की लापरवाही किसानों पर लगातार भारी पड़ रही है। एक सप्ताह में चार स्थानों पर नहर कटने से चार सौ बीघे फसल बर्बाद हो गई है। रविवार को त्रिवेदीगंज में नहर कटने से दस बीघा मेंथा की फसल बर्बाद हो गई। यह हालात तब हैं जब सिर्फ एक सप्ताह पहले ही नहरों में पानी छोड़ा गया है। जिम्मेदार अधिकारी इस खामियों में सुधार के लिए कोई कदम उठाते नजर नहीं आ रहे हैं। किसान अपनी बर्बादी को लेकर खासे परेशान हैं। इससे पहले सुढ़ियामऊ और दरियाबाद क्षेत्र में नहरें कट चुकी हैं।
त्रिवेदीगंज प्रतिनिधि के अनुसार दहिला प्राथमिक विद्यालय के निकट बहरौली रजबहा नहर कटने से पानी व सिल्ट सीधे मेंथा के खेतों में जमा होने लगी है। इसकी जानकारी मिलते ही किसानों में हड़कंप मच गया और किसान परीदीन, रामसुमिरन, मनीराम, केदार, छेदा, मुश्ताक, लायकराम आदि के दस बीघे मेंथा की फसल पानी में डूबकर बर्बाद हो रही है। खेत पर पहुंच किसान मेहनत से तैयार की गई मेंथा फसल की बर्बाद देख हताश होकर खेतों के किनारे बैठ गए। किसानों का कहना है कि नहर पटरी कटने की सूचना सिंचाई विभाग के अधिकारियों को दी गई थी लेकिन मौके पर कोई नहीं पहुंचा है।
जिस पर मौके पर मौजूद किसानों गांव के अन्य लोगों के साथ मौके पर पहुंचे और नहर पटरी को बांधने में जुट गए। किसानों ने बताया कि नहरों की सफाई के दौरान महज औपचारिकता निभाई जाती है जिसकी वजह से आए दिन नहरें कट जाती है। विभाग की इस लापरवाही का खामियाजा हम किसानों को भुगतना पड़ता है। लेकिन सिंचाई विभाग के जिम्मेदार अधिकारी इस मामले को लेकर जरा भी गंभीर नहीं दिखाई दे रहे हैं। सिंचाई विभाग के अवर अभियंता शैलेन्द्र प्रताप सिंह का कहना है कि जानकारी मिली थी सिंचाई कर्मियों को नहर पटरी बांधने के लिए मौके पर भेजा गया था लेकिन इससे पहले किसान नहर की पटरी को बांध चुके थे।