पूरा बाजार। सरयू नदी में संभावित बाढ़ और कटान को लेकर प्रशासन तथा सिंचाई विभाग राजा दशरथ समाधि और तटबंधों की सुरक्षा के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रहा है। वहीं, सदर तहसील के माझा क्षेत्र के दर्जनों गांवों के लोग आज भी स्थायी पुनर्वास और बुनियादी सुविधाओं की आस लगाए बैठे हैं।
माझा निवासियों का कहना है कि धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व के स्थलों की सुरक्षा आवश्यक है, लेकिन हर वर्ष बाढ़ से प्रभावित होने वाले हजारों परिवारों की समस्याओं के समाधान पर भी समान रूप से ध्यान दिया जाना चाहिए। बताते हैं कि अयोध्या से महबूबगंज शेरवाघाट तक फैले करीब 40 किलोमीटर माझा क्षेत्र में मुढ़ाडीहा, सलेमपुर, पूरे चेतन, पिपरी संग्राम, मड़ना, रामपुर पुवारी, माझा गाजीपुर समेत कई गांव हर वर्ष सरयू की बाढ़ और कटान की चपेट में आते हैं। कई सप्ताह तक पानी भरा रहता है। कई बार एक ही वर्ष में बार-बार बाढ़ आने से हालात और भी विकट हो जाते हैं।
तटबंध पर शरण लेना बनी मजबूरी
पूर्व ग्राम प्रधान मुढ़ाडीहा तेज बहादुर निषाद बताते हैं कि उनका गांव हर वर्ष बाढ़ की मार झेलता है। कई परिवारों की कृषि भूमि सरयू नदी में समा चुकी है। बाढ़ के दौरान अधिकांश ग्रामीण तटबंध पर शरण लेने को विवश होते हैं, जबकि कुछ परिवारों ने वहीं अस्थायी आश्रय बना लिया है। उनका कहना है कि सरकारी प्रयासों के बावजूद स्थायी समाधान अभी भी दूर दिखाई देता है। मड़ना के प्रधान प्रतिनिधि ओम प्रकाश यादव बताते हैं कि बाढ़ प्रभावित परिवारों के लिए हर वर्ष तीन माह का समय किसी अभिशाप से कम नहीं होता। बाढ़ का पानी उतरने के बाद भी दलदली जमीन के कारण सामान्य जीवन पटरी पर लौटने में लंबा समय लग जाता है। बच्चों की पढ़ाई बाधित होती है, किसी न किसी परिवार का पुश्तैनी घर कटान की भेंट चढ़ जाता है।
व्यवस्था पर सवाल उठा रहे बाढ़ पीड़ित
ग्रामीणों ने बाढ़ राहत व्यवस्थाओं पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि अधिकांश राहत केंद्र गांवों से काफी दूरी पर स्थित हैं। राजा दशरथ समाधि क्षेत्र के राहत केंद्र में बाढ़ के दौरान लोग खुले स्थानों पर तिरपाल लगाकर रहने को मजबूर होते हैं तथा शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव रहता है। हालांकि इस वर्ष मड़ना गांव के लिए आधुनिक बाढ़ राहत केंद्र का निर्माण कराया गया है, जहां आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।