जिला महिला अस्पताल में वसूली को लेकर हंगामा
- फोटो : अमर उजाला
प्रसव कराने गई एक प्रसूता को पहले तो भर्ती करने से मना कर दिया गया। बाद में परिवारीजनों के हंगामे के बाद उसे भर्ती करने के बाद सीजर से देर रात प्रसूता ने बच्ची को जन्म दिया।
परिवारीजनों का आरोप है कि पैसे की मांग पूरी न किए जाने पर अस्पताल की स्टाफ नर्सों ने जच्चा बच्चा को बेड के बजाए स्ट्रेचर पर लिटा दिया। गुरुवार को अस्पताल प्रशासन ने अपनी मर्जी से जबरन उसे डिस्चार्ज कर बाहर निकाल दिया गया। परिवारीजनों का आरोप है कि सीएमएस द्वारा उसे निजी अस्पताल में भर्ती कराए जाने का दबाव बनाया जा रहा था।
रामनगर थाना क्षेत्र के धनेड़ी निवासी बलराम की पत्नी लक्ष्मी तिवारी को बुधवार की शाम प्रसव पीड़ा होने पर उसे जिला महिला अस्पताल की इमरजेंसी में लाया गया। यहां पर मौजूद कर्मचारियों द्वारा उसे निजी अस्पताल में प्रसव कराने को कहा गया। प्रसूता के पति ने एतराज किया तो उससे स्टाफ ने अभद्रता की।
स्टाफ का कहना था कि जिला अस्पताल में पहले से इतनी भीड़ है इसे कहां भर्ती किया जाए। प्रसूता के परिवारीजनों के हंगामा के बाद किसी तरह उसे भर्ती कर लिया गया। बाद में देर रात सीजर से प्रसूता ने एक बच्ची को जन्म दिया। अस्पताल स्टाफ ने ऑपरेशन का शुल्क मांगा तो परिवारीजन नहीं दे सके। इसी वजह से जच्चा-बच्चा को बेड के बजाए स्ट्रेचर पर लिटा दिया गया।
सुबह पीड़ित ने इसकी शिकायत एसीएमओ से की तो सीएमएस आभा आशुतोष ने जच्चा बच्चा को जबरन डिस्चार्ज कर अस्पताल से बाहर कर दिया। परिवारीजनों ने विरोध किया तो उलटा कोतवाली में सभी के खिलाफ अस्पताल में बवाल करने की शिकायत कर दी। महिला के पति बलराम ने आरोप लगाया कि सीएमएस उसकी पत्नी को एक निजी अस्पताल में ले जाने को कह रही थीं।
महिला अस्पताल में प्रसूता को भर्ती कराने को लेकर हुए विवाद के बारे में कोई जानकारी नहीं है। मामले की जांच कराई जाएगी। जो भी दोषी पाया जाएगा उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। -डॉ. डीआर सिंह, सीएमओ।