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हादसे में मां-बेटे समेत तीन की मौत

Thu, 19 Nov 2015 10:50 PM IST
बाराबंकी/अमर उजाला ब्यूरो
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अमेठी जिले में सुल्तानपुर-लखनऊ मार्ग पर इन्हौना चौराहे पर टूरिस्ट बस से टकराई पिकप पर सवार हैदरगढ़ क्षेत्र के निवासी मां-बेटे समेत तीन की मौत हो गई। इस हादसे में पिकप चालक उसका दस वर्षीय पुत्र व दो भतीजे समेत पांच लोग घायल हुए हैं। देर रात सभी को सीएचसी में इलाज के लिए लाया गया था जहां से पांचों को गंभीर अवस्था में इलाज के लिए लखनऊ के ट्रॉमा सेंटर रेफर किया गया है।
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कोतवाली पुलिस ने तीनो शवों का पंचनामा कर पोस्टमार्टम के लिए जिला मुख्यालय भेजा है। अमेठी के पैतृक निवास शिवरतनगंज मुंडन संस्कार में शामिल होकर देर रात को पूरा परिवार पिकप से कस्बा स्थित घर वापस लौट रहा था।

कोतवाली स्थित कस्बे के मोहल्ला ब्रम्हनान निवासी कुमकुम बुधवार को परिवार के साथ अमेठी के शिवरतनगंज के अपने पैतृक निवास पर परिवार के साथ मुंडन संस्कार में शामिल होने गए थे। देर रात को घर वापस लौटते समय अमेठी के इन्हौना चौकी क्षेत्र में लखनऊ मार्ग पर पहुंचते ही पिकप जौनपुर की ओर जा रही टूरिस्ट बस से टकरा गई। सामने से हुई टक्कर में पिकप के परखच्चे उड़ गए और पिकप चला रहे कुमकुम व उनके परिजन गंभीर रूप से घायल हो गए।
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स्थानीय लोगों की मदद से घायलों को हैदरगढ़ सीएचसी भेजा गया। जहां चिकित्सक ने कुमकुम के आठ वर्षीय पुत्र सत्यम, इनकी पत्नी रीता व भाई किरसन की पत्नी ममता को मृत घोषित कर दिया। कुमकुम इनके बड़े पुत्र दस वर्षीय सक्षम, भाई किरसन इनके पुत्र आठ वर्षीय अंश व छह वर्षीय आयुष को गंभीर अवस्था में लखनऊ के ट्रामा सेंटर रेफर कर दिया गया है।

घटना की सूचना पर कस्बे में इनके परिचितों व रिस्तेदारों में हड़कंप मच गया तथा भारी संख्या में लोग सीएचसी पर जमा हो गए। विधायक राम मगन रावत ने मौके पर पहुंच कर शोक जताया है। कोतवाल चंद्रशेखर सिंह ने कहा दुर्घटना अमेठी के इन्हौना चौकी में हुई है। सीएचसी पर इलाज के लिए लाए गए मृतकों के शव पोस्ट मार्टम के लिए भेजे गए हैं।

तेज रफ्तार बनी हादसे का कारण
तेज रफ्तार से वाहन चलाने की आदत परिवार के ही खतरा बनेगी इसका अंदाजा होता तो कुमकुम कभी इतना जोखिम नहीं लेता। कस्बा हैदरगढ़ स्थित ननिहाल में मकान बनाकर रह रहे कुमकुम ने परिवार के पोषण के लिए पिकप लोडर वाहन खरीद रखा था।

 कस्बा वसियों की मानें तो सब्जी फल आदि का भाड़ा समय से पहले पहुंचाने में उसका कोई सानी नहीं था। अपनी इस तेजी का वह मोहल्ले में बखान करने से भी नहीं चूकता था। मुंडन संस्कार के बाद अपनी इसी आदत के कारण रात को ही घर वापस लौटने की जिद पूरेे परिवार के लिए मुसीबत बन गई और सभी को इस हादसे का शिकार होना पड़ा है।
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