अचानक ट्रेन से गिरने से मां-बेटी गंभीर रूप से घायल हो गई। यात्रियों ने चेन पुलिंग कर ट्रेन को रोका। गंभीर हालात में मां-बेटी को ट्रामा सेंटर भेजा गया है। पति का आरोप है कि आरपीएफ जवानों ने मारपीट कर मां-बेटी को ट्रेन से फेंक दिया। हालांकि, एसपी जीआरपी मां-बेटी को ट्रेन से फेंकने की बात से इंकार कर रहे हैं। उनका कहना है कि वह खुद नीचे गिरी हैं।
बलरामपुर के सादुल्लानगर में कुमाफातिमा जोत निवासी जुबैर अपनी पत्नी शकीला बानो (28) व दो साल की बेटी शिफा के साथ शुक्रवार दोपहर लोकमान्य तिलक सुपर फास्ट एक्सप्रेस से गोंडा जा रहा थे। ट्रेन का बाराबंकी में स्टापेज नहीं है। जुबैर की मानें तो शुक्रवार दोपहर डेढ़ बजे एस-4 बोगी में बेटी शिफा के साथ शकीला गैलरी में खड़ी थी।
बोगी में आरपीएफ के जवान भी सफर कर रहे थे। वे मुंबई से बलरामपुर घर जा रहे थे। उनके पास आरक्षण नहीं था। आरोप है कि बैठने के लिए आरपीएफ जवानों ने रुपये मांगे जिस पर विवाद हुआ। जवान ने शकीला को टोका जिस पर शकीला ने भी जवाब दे दिया। इस पर जवानों ने उसे तमाचा जड़ दिया।
धक्के के कारण गैलरी से शकीला और शिफा गिर गई। जुबैर का कहना है कि इससे पहले जवानों ने उसे भी पीटा था और जेब से रुपये भी निकाल लिए। टिकट छीनने का प्रयास किया। जीआरपी के थानाध्यक्ष राकेश बहादुर ने कहा कि आरोपों की जांच की जा रही है।
किसी ने भी महिला व उसकी पुत्री को ट्रेन से नीचे नहीं फेंका है। बेटी खिड़की से झांकते समय अचानक नीचे गिर गई थी जिसे बचाने के प्रयास में मां भी ट्रेन से नीचे जा गिरी है। दोनों का ट्रामा सेंटर में इलाज चल रहा है और उनकी हालत बेहतर है। पुलिसकर्मी यात्रियों की सुरक्षा के लिए होते हैं।
- विनय यादव, एसपी जीआरपी