बाराबंकी। हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा पाए जिला जेल में निरुद्ध कैदी विजय गिरी (55) की इलाज के दौरान मौत हो गई है। शहर के नागेश्वर नाथ मंदिर के रहने वाले कैदी की तबियत बिगड़ने पर उसे बृहस्पतिवार सुबह जेल प्रशासन द्वारा जिला अस्पताल लाया गया था। मृतक कैदी के परिवारीजनों ने जेल प्रशासन पर प्रताड़ना व इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए अस्पताल परिसर में हंगामा किया। मामले में जांच व कार्रवाई के लिए परिवारीजनों ने डीएम व एसपी को प्रार्थना पत्र दिया है। जबकि, जेल प्रशासन कैदी का बेहतर इलाज करवाने की बात कह रहा है।
कोतवाली नगर क्षेत्र मेें नागेश्वरनाथ मंदिर पीरबटावन मोहल्ला निवासी महंत विजय गिरी (55) पुत्र उत्तम गिरी व इनके दो भाइयोें लक्ष्मण गिरी व पुरुषोत्तम गिरी को हत्या के मामले में अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई थी। यह तीनों भाई 2 अगस्त 2013 से जेल में निरुद्ध है। इनमें से विजय गिरी की तबियत बिगड़ने पर जेल प्रशासन ने बृहस्पतिवार सुबह करीब 8.30 बजे उसे जिला अस्पताल पहुंचाया। जहां करीब आधे घंटे बाद उसकी मौत हो गई। मृतक के परिवारीजनों ने जेल प्रशासन पर कैदी के इलाज में लापरवाही बरतने व प्र्रताड़ित करने का आरोप लगाते हुए परिवारीजनों ने हंगामा करना शुरू कर दिया। इस बीच मामले की जानकारी पर पहुंचे सिटी चौकी इंचार्ज ने सभी को समझाकर शांत कराया। अस्पताल परिसर में हंगामे के दौरान लोगाें की भीड़ भी लगी रही। पुलिस ने कैदी के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा है।
सुविधा शुल्क के लिए जेलकर्मी कर रहे थे परेशान
मृतक कैदी महंत विजय गिरी की पत्नी कुसमा देवी ने डीएम, एसपी को प्रार्थना पत्र देकर मामले की जांच करवाने की मांग की है। इनका आरोप है कि मृतक विजय गिरी से मिलने वह 10 जून को जेल गई थी तब उनकी हालत ठीक थी। आरोप है कि विजय ने पत्नी को बताया था कि जेल में कर्मियाें द्वारा सुविधा शुल्क के लिए उन्हें बेवजह परेशान व प्रताड़ित किया जा रहा था। इन्हीं तमाम बातों व बीमार होने के बाद इलाज में लापरवाही बरतने की बात कहते हुए मामले में कार्रवाई की मांग की है।
हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे कैदी महंत विजय गिरी 2013 में जब जेल आए थे। तभी से गंभीर बीमारियाें से ग्रसित थे। कैदी का जिला अस्पताल में नियमित इलाज चल रहा था। बुधवार को भी विजय इलाज के लिए जिला अस्पताल गया था। इसके बाद बृहस्पतिवार सुबह अचानक तबियत बिगड़ने पर विजय को अस्पताल भेजा गया जहां उसकी मौत हो गई। कैदी को न तो प्रताड़ित किया जाता था और न ही उसके इलाज मेें किसी तरह की लापरवाही बरती गई है।
अशोक सागर, जेल अधीक्षक