ऑपरेशन मुस्कान चलाकर गुमशुदा बच्चों की तलाश कर उनके घर वालों के चेहरे पर मुस्कान लाने की कवायद जिले में धरी की धरी रह गई। एक से 31 जनवरी तक प्रदेश भर में चले इस ऑपरेशन के दौरान जिले में पुलिस एक भी लापता बच्चे को नहीं तलाश सकी। ऑपरेशन निर्धारित समय पर बंद हो गया लेकिन जिले के लापता तीन दर्जन से अधिक बच्चों का कोई सुराग नहीं लग सका है। पुलिस ने कई मामलों में लापरवाही बरती जिसके कारण मासूमों को अपनी जान तक गंवानी पड़ी। आज भी कई परिवारों की रातें लापता बच्चों के इंतजार में गुजर रही हैं।
ऑपरेशन मुस्कान जिले के किसी भी परिवार के चेहरे पर मुस्कान नहीं ला सका। डीजीपी ने सभी जिलों के पुलिस कप्तान को एक जनवरी से 31 जनवरी तक ऑपरेशन मुस्कान चलाकर सभी थाना क्षेत्रों सेे लापता हुए बच्चों का अवलोकन कर उनकी तलाश कराने के निर्देश दिए थे। एक माह तक चला ऑपरेशन मुस्कान बंद भी हो गया लेकिन एक भी बच्चे की घर वापसी कराने में पुलिस को सफलता नहीं मिली।
जिले से लापता तीन दर्जन से अधिक बच्चों को तलाशने के लिए पुलिस ने कोई ठोस कदम ही नहीं उठाया। बच्चों के लापता होने के बाद पुलिस द्वारा प्रभावी कार्रवाई नहीं करने से कुछ मासूमों को अपनी जान तक गंवानी पड़ी।
इन बच्चों का आज तक नहीं लगा सुराग
सफदरगंज थाना क्षेत्र के बिकौली गांव का ढाई वर्षीय प्रिंस, देवा के पटना गांव की प्रियांशी, हैदरगढ़ के घरकुइयां की स्वाति, चक चौबीसी की सरिता, कुरौली के दीपेश मिश्र, कोतवाली के उत्तरी टोला की लक्ष्मी पाठक, टिकैतनगर आई फैजाबाद के सुभाष की पांच माह की बेटी मीनाक्षी व जैदपुर के हरख गांव के 10 वर्षीय उत्तरदायित्व लापता हैं। इसके अलावा टिकैतनगर के डडियामऊ के विवेकानंद सिंह की बेटी लवली, बरगदहा के प्रदीप का पुत्र संदीप, नगर के ईजीडे के श्रमिक बीरू निषाद, अभय नगर के प्रज्ञाल पांडेय, सफेदाबाद के दिनेश, मंझपुरवा की महिमा समेत करीब 36 बच्चे आज भी लापता हैं।