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गोरखपुर लैब की जांच रिपोर्ट में मैगी का नमूना फेल होने पर कोर्ट ने विक्रेता सप्लायर व नेस्ले कंपनी पर 6.5 लाख का जुर्माना लगाया है। मई 2015 में अलग-अलग स्थानों से लिए गए मैगी के नमूने लैब में फेल होने के बाद एडीएम कोर्ट में इसका वाद चल रहा था।
एफएसडीए के क्षेत्रीय अधिकारी उमेश सिंह ने 8 मई 2015 को लोनीकटरा थाना क्षेत्र के इलियासपुर निवासी चंद्र नरायण पुत्र हरी प्रसाद की दुकान से मैगी का नमूना भरा था। वहीं फतेहपुर क्षेत्र के खाद्य सुरक्षा अधिकारी वीरेंद्र कुमार ने 27 मई 2015 को उमेश चंद्र पुत्र जगमोहन लाल की फतेहपुर स्थित दुकान से व यहीं के सप्लायर रवींद्र ट्रेडर्स से सैंपलिंग की गई थी।
सभी नमूनों को जांच के लिए गोरखपुर स्थित लैब भेजा गया था। जांच में लोनीकटरा से भरे गए नमूने में लो एडिड एमएसजी गुडनेस फॉर कैल्सियम एंड प्रोटीन टेस्ट-बी हेल्थ-बी लैब में गलत पाया गया।
जिसे खाद्य सुरक्षा मानक अधिनियम 2006 के तहत नियम उल्लंघन का दोषी पाया गया। कोर्ट ने विक्रेता उमेश पर 25 हजार रुपये व सप्लायर एसजी फूड्स नोएडा पर एक लाख व नेस्ले कंपनी पर 2.5 लाख रुपये का जुर्माना ठोंका है।
वहीं फतेहपुर का नमूना अधोमानक पाया गया जो नूडल के मानक पर खरा नहीं उतरा। इसमें विक्रेता वीरेंद्र पर 25 हजार, सप्लायर रवींद्र ट्रेडर्स पर 50 हजार व नेस्ले कंपनी पर 2 लाख रुपये का जुर्माना एडीएम कोर्ट ने लगाया है।
मई 2015 में मैगी नूडल के लिए गए नमूने जांच में फेल पाए गए थे। जिसका वाद एडीएम कोर्ट पर चल रहा था। 30 मार्च को कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए विक्रेता, सप्लायर व नेस्ले कंपनी समेत 6.5 लाख रुपये जुर्माने की कार्रवाई की है। -मनोज वर्मा, अभिहीत अधिकारी एफएसडीए