पंचमदास कुटी के महंत बाबा बिहारी दास का आखिर दस दिन बाद पता चल ही गया। वह देवराकला राजगढ़ मध्यप्रदेश स्थित अपने गुरुभाई के आश्रम में पाए गए। बाराबंकी से गए कुछ लोग उन्हें लेकर लौट रहे हैं। फोन पर बातचीत के दौरान बाबा ने बताया कि वह आश्रम से गए नहीं, बल्कि मारपीट व जान जाने के डर से भागे थे।
पंचमदास कुटी के महंत बिहारी दास की तलाश में गए सभासद दिनेश तिवारी ने बताया कि महंत बिहारी दास देवराकला राजगढ़ मध्यप्रदेश स्थित अपने गुरू भाई के आश्रम में मिल गए हैं। उन्हें वापस लाया जा रहा है। दिनेश के माध्यम से हुई महंत बिहारी दास से फोन पर हुई बातचीत में उन्होंने कई खुलासे किए।
उन्होंने कहा कि वह आश्रम में 1988 से हैं। कुटी में भगवान श्रीकृष्ण, रामजानकी व शंकर जी का मंदिर है। पास ही गुरू भाई बाबा भारतदास की समाधि है। पिछले 8 अगस्त 2013 में आश्रम के मुख्य महंत का देहांत होने के बाद से वह यहां पर अकेले रहते हैं।
उन्होंने बताया कि मुख्य मंहत के देहांत के बाद दिसंबर 2013 से कुछ लोग प्रताड़ित करने लगे। सत्ता पक्ष का भय दिखा कर आश्रम छोड़ने को मजबूर करने लगे। कई बार मारपीटा भी। पुलिस में शिकायत किए जाने पर जान से मारने की धमकी भी दे रहे थे।
इस मामले की कई बार शिकायत भी की लेकिन कुछ भी राहत नहीं मिली जिससे वह जान बचाने के लिए कुटी छोड़ कर चले गए। बाराबंकी वापस आने के संबंध में पूछे जाने पर उन्होंने साफ इंकार कर दिया।