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बाबा ने कई लोगों फर्जी मुकदमे में फंसाया

Sat, 14 May 2016 11:30 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/बाराबंकी
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आश्रम में मिले एलबम की जांच करती पुलिस - फोटो : अमर उजाला
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 हर्रई आश्रम के बाबा परमानंद के रुतबे व रसूख के आगे अच्छे-अच्छे नतमस्तक दिखते थे। आश्रम में आने वाले वीआईपी व अफसरों के नाम की धौंस झाड़ने वाले इस अधर्मी बाबा के इशारे पर पुलिस भी नाचती दिखती थी। यही नहीं जिस किसी ग्रामीण व भक्त ने बाबा से बगावत की कोशिश की तो परमानंद के एक इशारे पर पुलिस उस पर दबाव बनाना शुरू कर देती थी।
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इन बागियों के पास बाबा की शरण में जाने का विकल्प बचता था नहीं तो उसके खिलाफ संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज करा दिया जाता था। ग्रामीण बताते हैं कि अपने खिलाफ उठने वाले स्वर को दबाने में माहिर यह बाबा लग्जरी गाड़ियों के काफिले के साथ हथियार बंद मिली सुरक्षा कर्मियों के साये में चलता था। 

बाबा ने इन ग्रामीणों को फंसाया फर्जी मुकदमों में --
केस-1
10 जनवरी 2014 को बाबा परमानंद उर्फ रामशंकर तिवारी ने गांव के ही चंदू तिवारी, शिवराम वर्मा, हरिश्चंद्र के खलाफ मारपीट, गाली गलौज का मुकदमा दर्ज कराया था। वाद अब भी चल रहा है। 
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केस-2
13 अप्रैल 2013 को बाबा ने आश्रम पर आनें वाले भक्त आनंद वर्मा निवासी रसूलपुर कोतवाली नगर के खिलाफ बलवा, गाली गलौज का मुकदमा दर्ज कराया था। वाद अभी भी चल रहा है। 

केस-3 
21 अप्रैल 1988 को बाबा ने ग्रामीण मैकू गौतम, गोकरन, श्रीराम, अमर, शिव बहादुर सहित नौ लोगों के खिलाफ बलवा गाली गलौज का मुकदमा दर्ज कराया था। वाद अभी भी चल रहा है।

कमरे का नक्शा ही बदल दिया
बाबा परमानंद के आश्रम के भीतर की रहस्यमयी दुनिया से एक बार फिर पर्दा उठते-उठते रह गया। पुलिस शनिवार को जब बाबा के वातानुकूलित कमरे की हकीकत जानने की खातिर घुसी तो बाबा के चेलों ने इन कमरो का पूरा ड्राइंग ही बदल डाला था। कभी बेहद आलीशान स्वरूप वाले इस कमरे में जब पुलिस पहुंची तो वहां पर एक फटा सोफा व कुछ धार्मिक पुस्तकें ही मिलीं। 

पंजीकरण के लेता था पांच सौ रुपये
बाबा परमानंद के आश्रम में भक्तों कसे बाकायदा वसूली के लिए एक कैश काउंटर बनाया गया था। जिसे भक्तों की भाषा में अरजी काउंटर कहा जाता था। बताते हैं कि इस काउंटर पर नए भक्तों के पंजीकरण के नाम पर 500 रुपये की पर्ची, नजराना व अरजी फीस जमा की जाती थी। 

खास भक्तों की बनती थी आईडी
आश्रम में आने वाले नए भक्तों को पहले विश्वास लिया जाता था। इसके बाद बाकायदा उसका कम्प्यूटराइज्ड आईडी (परिचय पत्र) बनाया जाता था। बताते हैं कि भक्त जब तक आश्रम व बाबा क प्रति आस्थावान नहीं हो जाता था तब तक उसकी आईडी जनरेट नहीं की जाती थी। इसके अलावा बाबा निसंतान भक्तों को डरा धमकाकर शोषण करता था। मसलन बच्चा न होने पर एक अभिशाप होने के साथ ही पुगू नामक नरक में जाना पड़ेगा जैसी कहानी सुनाई जाती थी।
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