हैदरगढ़ कोतवाली के समीप उपनिबंधन कार्यालय परिसर में पूर्व प्रधान को मारपीट कर एक लाख रुपये छीन ले जाने की वारदात को ही पुलिस फर्जी बताने में जुटी है। वारदात में नामजद पिता-पुत्रों की तलाश करने के बजाय भूमि बिक्री करने आए किसानों को कोतवाली बुला मनमाफिक बयान लेकर आरोपियों को लाभ पहुंचाया जा रहा है। वहीं सीएचसी से गंभीर अवस्था में रेफर होकर जिला चिकित्सालय इलाज कराने गए पूर्व प्रधान ने मारपीट कर रुपया छीने जाने के बयान पर कायम रहते हुए कहा वारदात के बाद ही पुलिस तहरीर से रुपया लूटे जाने का मामला नहीं दर्शाने का दबाव डाल रही थी।
मंगलवार को कोतवाली के सहावर के गांव के पूर्व प्रधान रामसुफल तिवारी व लखनऊ के मिंटू द्विवेदी ग्राम पंचायत में स्थित भूमि की रजिस्ट्री कराने भूस्वामी रामखिलावन को साथ लेकर उपनिबंधन कार्यालय पहुंचे थे। दोपहर बाद कार्यालय परिसर में कुछ लोगों ने पूर्व प्रधान को मारना-पीटना शुरू कर दिया तथा घायल अवस्था में छोड़ कर भाग गए। पूर्व प्रधान ने तत्काल कोतवाली पहुंच कर मारपीट कर पोखरा के अनिल द्विवेदी व इनके दो पुत्रों समेत कई अज्ञात पर मारपीट कर एक लाख रुपया छीन कर फरार होने का आरोप लगाया था लेकिन पुलिस आरोपियों की तलाश करने के बजाय पूर्व घटना को ही झुठलाने में लगी रही व बकौल पूर्व प्रधान पुलिस नेे तहरीर से रुपया छीने जाने को हटाने के लिए काफी दबाव बनाया तथा काफी जद्दोजहेद के बाद चिकित्सीय परीक्षण के लिए भेजा गया।
इसके बाद रात में ही पुलिस ने भूस्वामी को कोतवाली लाकर उससे मनचाहा बयान लिखवा कर मजबूरी में लिखी रिपोर्ट से कुछ समय बाद ही लूट की धाराएं व अन्य अज्ञात को हटा कर मामले की लीपापोती शुरू कर दी है। एक दिन बाद भी पुलिस आरोपियों के बारे में पूछने पर लूट की घटना को फर्जी बताकर मामले की जांच होने की बत कह रही है।