गर्भवती की मौत पर परिवारीजनों ने अस्पताल पर किया हंगामा
घर वालों ने झोलाछाप पर लगाया गलत इलाज का आरोप
हैदरगढ़ कोतवाली क्षेत्र के मनोकामना अस्पताल की घटना
पहले भी इसी अस्पताल में जच्चा-बच्चा की हो चुकी मौत
फोटो- 21 से 24
अमर उजाला ब्यूरो
हैदरगढ़ (बाराबंकी)। झोलाछापों पर प्रभावी कार्रवाई न होने से ये लोग बेखौफ लोगों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। बुधवार को झोलाछाप के इलाज से एक गर्भवती महिला की मौत होने का मामला प्रकाश में आया है। आरोपी डॉक्टर महिला की हालत बिगड़ने पर उसे ब्लड चढ़ाने के नाम पर निजी वाहन से लेकर लखनऊ के एक निजी अस्पताल पहुंच गया। महिला की मौत हो जाने पर डॉक्टर उसके परिवारीजनों व शव को एक एंबुलेंस से घर भेजवाने के बाद मौके से भाग गया। शव घर आने पर परिवारीजनों ने हंगामा करना शुरू कर दिया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
हैदरगढ़ थाना क्षेत्र के ग्राम पूरे निरंजन अंसारी निवासी कमलेशा (22) पुत्री रामशंकर को सात माह का गर्भ था। बीते 11 जून को उसे रक्तस्राव होने पर परिवारीजन उसे सीएचसी त्रिवेदीगंज ले गए। यहां पर जांच कर उसे बेड रेस्ट करने की बात कहते हुए घर वापस कर दिया गया। मंगलवार सुबह उसे फिर तेज ब्लीडिंग शुरू हुई तो उसकी बड़ी बहन शांती व भाई चेतराम, विजय उसे लेकर सीएचसी हैदरगढ़ जा रहे थे। लखनऊ-सुल्तानपुर मार्ग पर मनोकामना अस्पताल के बाहर बैठे अशोक शुक्ला ने उसे तीन दिन में ठीक करने की बात कहते हुए भर्ती कर लिया। भाई का आरोप है कि भर्ती के समय आठ हजार रुपये मांगेे थे जिसमें से चार हजार जमा करने पर इलाज शुरू हुआ। अस्पताल में मौजूद डॉ. एन कुमारी व अशोक शुक्ला ने उसका इलाज शुरू कर दिया। तीन घंटे बाद पेट में बच्चे की मौत की बात कहते हुए गर्भपात कराने को कहा। गर्भपात करते समय उसकी हालत और बिगड़ गई। डॉक्टर उसे अपनी कार से लखनऊ के मोहनलाल गंज स्थित एक निजी अस्पताल लेकर चला गया। जहां बुधवार की सुबह चार बजे प्रसूता की मौत हो गई। मौत होने के बाद शव व उसके भाई विजय को एंबुलेंस से घर भेज डॉक्टर फरार हो गया। घर शव आने पर परिवारीजनों ने एंबुलेंस को रोक लिया और हंगामा करने लगे। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा दिया।
ब्लीडिंग रोकने के लिए दोनों पैरों को ऊपर बांध दिया
पेट में बच्चे की मौत होने पर उसके गर्भपात के लिए डॉक्टरों ने प्रसूता को कई प्रकार की गोलियां खिलाईं। गर्भपात न होने व तेज ब्लीडिंग को रोकने के लिए उसके दोनों पैर ऊपर बांध दिए। प्रसूता की बहन शांती देवी ने बताया कि वह पर्दे के पीछे से सब देख रही थी। इसका विरोध किया तो दोनों ने कहा कि किसी तरह बच्चा तो निकालना है।
दो मासूमों के सिर से उठा मां का साया
कमलेशा का विवाह पांच साल पर्व अमेठी जिले के शिवरतनगंज थाना क्षेत्र के ग्राम जमुनीपुर निवासी राम प्रकाश के साथ हुआ था। उसके दो बेटे विकास (4), सागर (2) हैं। कमलेशा एक सप्ताह पूर्व अपने मायके भंडारे में शामिल होने आई थी। दोनों बेटों के सिर से मां का साया उठ चुका है।
पहले भी हो चुकी है जच्चा-बच्चा की मौत
मनोकामना अस्पताल का पंजीकरण कराने के लिए जिन एमबीबीएस डॉक्टरों के नाम दिए गए, उनमें से एक भी डॉक्टर कभी अस्पताल में नहीं आता है। अस्पताल में एक महिला डॉक्टर एन कुमारी व झोलाछाप अशोक ही बैठते हैं। एक साल पूर्व शिवरतनगंज थाना क्षेत्र के कहवापुर निवासी दीपक की पत्नी राजकुमारी को प्रसव के लिए यहां लाया गया था। जहां रात भर भर्ती कर उसका इलाज करने के नाम पर रुपये की वसूली की गई और सुबह जच्चा-बच्चा की मौत हो गई। पीड़ित ने मामले की शिकायत सीएमओ से की पर कोई कार्रवाई नहीं हो सकी।
गलत इलाज से हुई गर्भवती की मौत
गर्भवती महिला का पोस्टमार्टम दो चिकित्सको डॉ. धर्मवीर सिंह व डॉ. एसपी सिंह के पैनल तले किया गया। डॉक्टरों का कहना है कि झोलाछाप द्वारा गर्भ में बच्चे की मौत के बाद गर्भपात कराने के लिए अपनाया गया तरीका गलत था। मृत बच्चे को बाहर निकालते समय महिला की यूट्रेस का पेरीनियल व यूट्रेस का सर्विस फट गया। जिससे महिला को पोस्ट पार्टन हैम्रेज (पीपीएच) होने से तेज ब्लीडिंग हुई। जिससे उसकी मौत हो गई। अगर परिजन ट्रेंड चिकित्सक या फिर महिला अस्पताल में महिला को भर्ती कराते तो उसकी जान बच सकती थी।
वर्जन-
झोलाछाप के इलाज से जच्चा-बच्चा की मौत होने की जानकारी नहीं है। इस संबंध में टीम गठित कर मामले की जांच कराई जाएगी। -डॉ. डीआर सिंह, सीएमओ
वर्जन-
प्रसूता के भाई विजय द्वारा झोलाछाप के इलाज से मौत होने की तहरीर दी गई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। -पीके तिवारी, इंस्पेक्टर हैदरगढ़