बाराबंकी। बेसिक शिक्षा विभाग के परिषदीय विद्यालयों में फर्जी प्रमाण-पत्रों से नौकरी हासिल कर पांच करोड़ रुपये वेतन उठाने वाले शिक्षकों से विभाग वसूली नहीं कर सका है। इनका फर्जीवाड़ा पकड़ में आने के बाद इनकी सेवाएं समाप्त कर विभाग रिकवरी करना भूल गया। ऐसे में सरकार को करोड़ों के राजस्व को लगी चपत की भरपाई नहीं हो पा रही।
बता दें कि जिले में पिछले ढाई सालों में फर्जी व दूसरों के शैक्षणिक प्रमाण-पत्रों के आधार पर नौकरी करते 19 शिक्षक पकड़े गए। इनमें दो दम्पति और पिता-पुत्र समेत 12 शिक्षक वर्ष 2009 में नौकरी हासिल कर प्रमोशन का लाभ उठाते हुए 10 वर्षों तक लाखों की पगार उठाते रहे। वहीं वर्ष 2018 में शिक्षक भर्ती के सात शिक्षक वेतन पाने से पहले ही बर्खास्त कर दिए गए।
दस वर्षों से नौकरी करने वाले फर्जी शिक्षकों में जयशंकर दूबे, उनका बेटा रविशंकर त्रिपाठी, सुरेंद्र नाथ, नवनीता यादव, अभिषेक त्रिपाठी उनकी पत्नी स्वाती, शशिकांत मिश्र, रजत कुुमार सिंह, अतुल कुमार सिंह, प्रमोद सिंह उनकी पत्नी अर्चना पाण्डेय, मौसमी सिंह शामिल हैं। ये सभी फर्जी व दूसरों के प्रमाण-पत्रों के आधार पर नौकरी करते पाए गए थे। इनकी सेवा समाप्त कर दी गई है।
नौकरी के दौरान इन शिक्षकों को भुगतान किए गए वेतन का आगणन कराया गया तो एक शिक्षक पर करीब 43 लाख रुपये की रिकवरी तय हुई। वहीं सात शिक्षक ममता, विनोद सोनी, अजय प्रताप, शोभित अवस्थी, सूरज उपाध्याय, रेनू व जय कुमार सिंह की वेतन पाने से पहले ही सेवा समाप्त कर दी गई। मगर, दो साल से अधिक समय बीत जाने के बाद पांच करोड़ रुपये का वेतन उठाने वाले शिक्षकों से विभाग वसूली तक नहीं कर सका है।
फर्जी व दूसरों के प्रमाण-पत्रों के आधार पर नौकरी करने वाले जिन शिक्षकों की सेवा समाप्त की गई है। उनसे जल्द ही वेतन की रिकवरी की जाएगी। इसका आगणन करा लिया गया है।
-राजेश कुमार वर्मा, डीआईओएस