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कलकत्ता से धरा गया करोड़ों की ठगी करने वाला विश्वास ट्रेडिंग कंपनी का मुखिया

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बाराबंकी। मल्टीलेवल मार्केटिंग के नाम पर एक कंपनी बनाकर निवेशकों से करीब चार सौ करोड़ से भी अधिक की ठगी करने वाले विश्वास ट्रेडिंग कंपनी के मुखिया को आखिरकार जिले की क्राइम ब्रांच टीम ने कलकत्ता में धर दबोचा है। क्राइम ब्रांच आरोपी को वहां के कोर्ट के आदेश पर अब बाराबंकी लेकर आ रही है। इसके बाद पुलिस आरोपी से पूछताछ कर अन्य आरोपियों पर भी कार्रवाई करेगी। इस मामले में लखनऊ के विभूतिखंड, गोमती नगर व बाराबंकी शहर कोतवाली में मुकदमा दर्ज है। कंपनी ने यूपी के कई जिलों समेत अन्य प्रदेशों में भी बड़े स्तर पर ठगी की है।
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एसपी डॉ. अरविंद चतुर्वेदी ने बताया कि प्रेम प्रकाश सिंह निवासी कोठी डीह थाना कोतवाली शहर की तहरीर पर पुलिस ने बीते 24 जून को आरोपी धीरज बहादुर सिंह, विश्वजीत विश्वास, धीरज श्रीवास्तव, विनोद कुमार, शंकर गायन उर्फ मिट्ठू, प्रसेनजीत सरदार, भारत मोदी, संदीप मैती, चंचल प्रसाद सिंह, अनुराग देव पांडेय निवासी पश्चिम बंगाल कलकत्ता के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज कराई थी। आरोप है कि इन सभी ने विश्वास ट्रेडिंग कंपनी के नाम पर कूट रचित व फर्जी तरीके से लगभग 19 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी करके रुपये हड़प लिया। पैसा मांगने पर जान से मारने की धमकी दे रहे है।
पुलिस ने इस मामले में संदीप मैती निवासी वीपी टाउनशिप टेलीफोन हाउसिंग कांपलेक्स थाना पाटूली पश्चिमी बंगाल कलकत्ता को बीते आठ अगस्त को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। वर्तमान में इस मामले की विवेचना क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर राकेश कुमार सिंह द्वारा की जा रही है। अभियुक्तों की गिरफ्तारी के लिए जिले से क्राइम ब्रांच की टीम पश्चिम बंगाल कलकत्ता भेजी गयी थी। टीम ने आरोपी शंकर गायन उर्फ मिट्ठू (निदेशक, विश्वास ट्रेडिंग प्राइवेट लिमिटेड) निवासी योरे कुकुर दक्षिण पारा थाना रिशरा हुगली पश्चिमी बंगाल को मंगलवार को गिरफ्तार किया। वहां कोर्ट में पेश करने के बाद ट्रांजिट रिमांड पर अब बाराबंकी लाया जा रहा है। एसपी ने बताया कि इस मामले में शेष आरोपियों के विरुद्ध गिरफ्तारी का प्रयास जारी है।
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इसी मामले में बीते 10 जनवरी 2019 को शहर कोतवाली में एक केस दर्ज किया गया था। जिसके बाद कंपनी के निदेशक शंकर गायन, धीरज श्रीवास्तव व एक अन्य आरोपी को जेल भेजा गया था। पुलिस पर इस दौरान आरोप लगा था कि उनके द्वारा 65 लाख रुपये बतौर रिश्वत ली गई है। इसके बाद मामले की जांच डीजीपी ने एसटीएफ को सौंपी थी। गंभीर मामला होने के चलते शासन ने तत्कालीन एसपी डॉ. सतीश कुमार को निलंबित किया था। इस मामले में लखनऊ के हजरतगंज कोतवाली में केस दर्ज हुआ था और जिले में साइबर सेल में तैनात एसआई अनूप कुमार को जेल भेजा गया था, जबकि एक सिपाही भी आरोपी बनाया गया था।
इस कंपनी में बाराबंकी जिले के लोगों द्वारा 50 करोड़ से भी अधिक रुपये निवेश किए गए। कंपनी द्वारा लोगों को धोखा देकर निवेश कराया जाता था। कंपनी के संचालक, सदस्य जिले में व्यापक स्तर पर सेेेमीनार कर दो सौ रुपये प्रति व्यक्ति सदस्य बनाते थे। इसके बाद शेयर मार्केट में ट्रेडिंग करने के लिए एक बैंक अकाउंट खुलवाते थे। चूंकि कंपनी की कैपिटल अधिकतम दो लाख रुपये है, इसके चलते कंपनी मूलरूप से सबब्रोकर की ही भूमिका निभाती थी। इसके द्वारा सदस्य बनने के बाद 3:2 के अनुपात में लेफ्ट व राइट चेन बनाकर मल्टीलेवल मार्केटिंग के तर्ज पर लोगों से पैसे इकट्ठा करते थे। किअसंद्रा थाने में दे दी तैनाती
इस मामले में 65 लाख रुपये वसूली के आरोप में लखनऊ पुलिस द्वारा जेल भेजे गए दरोगा अनूप यादव को जिले के असंद्रा थाने में तैनाती दी गई है। जबकि साइबर सेल में कार्यरत रहने के दौरान दरोगा पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे थे। इसके बाद भी इसे थाने में तैनाती देना विभाग में चर्चा का विषय बना है।
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