बाराबंकी। वर्ष 2016 में थाना देवा के हर्रई गांव में स्थित आश्रम में कथित दुराचार मामले का फैसला सुनाते हुए अपर जिला जज अशोक कुमार यादव ने तीनों आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया। इसी के साथ कोर्ट ने आदेश दिया कि अपने बयान व घटना से मुकरने वाली वादिनी व साक्षी उसके पति के विरुद्ध केस दर्ज कर कार्रवाई का आदेश दिया है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, थाना देवा के एक गांव निवासी वादिनी ने पुलिस में तहरीर देकर कहा था कि उसके गांव में स्थित एक आश्रम का संचालक राम शंकर तिवारी उर्फ तांत्रिक बाबा उर्फ शक्ति बाबा उर्फ स्वामी परमानंद से वह मिली तो उसने पुत्र देने का दावा करते हुए कुछ धन खर्च करने की बात कही। जिस पर तुम्हारे पुत्र पैदा होगा।
बाबा के कहे अनुसार 25 हजार रुपये वादिनी ने बाबा को दिये। जब कुछ नहीं हुआ तो वह बाबा से बात कर उनसे मिली और बात की। इस पर बाबा ने बड़ी पूजा कराने को कहा। जिस पर 50 हजार रुपये उसने बाबा को और दिये। उसके बाद भी कुछ नही हुआ तो 18 अप्रैल 2016 को रात नौ बजे वह बाबा से मिली और कहा कि 75 हजार रुपये आपने ठग लिए हैं।
इस पर बाबा ने उसके कपड़े फाड़ने के बाद दुष्कर्म किया। उसके बाद जान से मारने की नीयत से गला दबा दिया। डर वश समय पर शिकायत नहीं दर्ज कर सकी और वादिनी ने 22 मई 2016 को तहरीर दी थी। जिस पर देवा पुलिस ने तांत्रिक बाबा व संजय के विरुद्ध दर्ज किया था। विवेचक ने तांत्रिक बाबा, संजय प्रताप सिंह व अरविंद पाठक के विरुद्ध आरोपपत्र कोर्ट में दाखिल किया था।
न्यायालय में विवेचक ने वादिनी का बयान पहले दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 164 के तहत कराया था। उस बयान में वादिनी ने घटना का समर्थन किया था। साक्ष्य के दौरान दोबारा कोर्ट में हुए बयान में वादिनी व उसके पति ने घटना से पूरी तरह अनभिज्ञता जताते हुए इंकार कर दिया था। इन हालातों में कोर्ट ने सबूत के अभाव में मामले के सभी तीनों आरोपियों को दोष मुक्त कर दिया। वहीं वादिनी व उसके पति पर केस दर्ज कर कार्रवाई के आदेश दिए।