बाराबंकी। किसी को भी आंखों में पीछे की तरफ दर्द, भारीपन, आंख में पानी आना, एक वस्तु दो दिख रही हो या दिखना बंद हो जाए एवं सांस लेने मेें परेशानी हो तो नेत्र रोग विशेषज्ञ को दिखाना चाहिए। जिला अस्पताल के नेत्ररोग विशेषज्ञ डॉ. संजीव साहू ने बताया कि ब्लैक फंगस को लेकर ज्यादा परेशान नहीं होना चाहिए। शुरुआती लक्षण को देखकर नेत्ररोग विशेषज्ञ की देखरेख में उपचार शुरू कर देना चाहिए।
ब्लैक फंगस (म्यूकॉेमायकोसिस) त्वचा के साथ नाक, फेफड़ों और मस्तिष्क तक को नुकसान पहुंचा सकता है। ब्लैक फंगस (म्यूकोरमायकोसिस) नाक से फैलता है। इस फंगस को गले में शरीर की एक बड़ी धमनी कैरोटिड आर्टरी मिल जाती है। आर्टरी का एक हिस्सा आंख में रक्त पहुंचाती है। फंगस रक्त में मिलकर आंख तक पहुंचता है। ब्लैक फंगस के चपेट में आने की पहली वजह संक्रमित ऑक्सीजन मास्क का इस्तेमाल है। इसके अलावा वे लोग भी होते हैं जिनकी अधिक डायबिटीज हो, लंबे समय तक स्टेरॉयड द्वारा ट्रीटमेंट लिया गया हो।
इस बीमारी के शुरुआती लक्षण
ब्लैक फंगस की चपेट में आने से सबसे पहले आंख अचानक लाल हो जाती है, और आंख में सूजन आएगी। नजर कमजोर पड़ने लगेगी। आंखों व नाक के आसपास लालिमा के साथ दर्द होना, सांस में तकलीफ, सिर दर्द, बुखार और मानसिक रूप से कुछ तकलीफ होना इसके लक्षण हैं।
यह बरते सावधानियां
स्टेरॉयड का सही समय पर उचित इस्तेमाल करें। विशेषज्ञ डॉक्टर के नियमित संपर्क मेें रहें। मास्क पहनें और धूल या गंदगी वाले स्थानों पर बिल्कुल न जाएं।
ऐसा महसूस हो तो डॉक्टर से सलाह लें
आंख के नीचे चेहरे की हड्डी (चीक बोन) में दर्द होना, चेहरे में दर्द, सूनापन या सूजन का अहसास होना, धुंधला दिखाई देना, दो-दो दिखाई देना, सीने में दर्द, सांस लेने की तकलीफ बढ़ने जैसा महसूस हो तो नेत्र विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए।