जिले में खाद बिक्री के लिए जिला कृषि अधिकारी कार्यालय द्वारा 1080 प्राइवेट दुकानदारों को लाइसेंस दिया गया है। वहीं, 168 सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों को खाद वितरण की जाती है। धान का सीजन चरम पर है। किसान खाद के लिए दर दर भटक रहा है, लेकिन उसे खाद नहीं मिल रही है। रविवार को शहर के मेन रोड स्थित एक अवैध गोदाम पर छापा मारा गया तो अंदर नकली खाद बनाने बड़ा कारखाना निकला। हजारों बोरी नकली खाद बरामद हुई। आरोपी विकास अग्रवाल का लाइसेंस निरस्त किया गया। मुकदमा दर्ज हुआ। फिर भी उसकी सीनाजोरी के दूसरे गोदाम से नकली खाद की बिक्री करने लगा। किसानों की शिकायत पर यह कार्रवाई विभाग को न चाहते हुए भी करनी पड़ी। कार्रवाई करने में काफी देर हो चुकी थी तब तक आरोपी व्यापारी लगभग ढाई हजार किसानों को नकली खाद बेच चुका था। दूसरी तरफ 68 सहकारी समितियों में खाद का पर्याप्त स्टाक है, लेकिन किसानों को एक बोरी के लिए भी दर्जनों चक्कर लगाना पड़ता है जिससे वह मजबूर होकर निजी दुुकान से महंगे दाम पर खाद खरीदता है।
16 नमूने फेल पर मुकदमा सिर्फ एक पर
नकली खाद बाजार में न आने पाए इसके लिए जिला कृषि अधिकारी को समय-समय पर अभियान चलाकर दुकानों पर छापेमारी कर खाद के नमूने भरकर जांच करनी चाहिए। कृषि अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों पर कितने खरे उतरे इस बात का पता उनके दो साल में की गई कार्रवाई से पता लग रहा है। दो साल में कुल 334 सभी प्रकार के उर्वरकों के नमूने लिए गए जिसमें से 16 के सैंपल लैब में फेल हुए, जिसमें 15 दुकानों के लाइसेंस निरस्त व मात्र एक के खिलाफ मुकदमा पंजीकरण कराया गया। इस कार्रवाई से जिला कृषि अधिकारी राम कुमार यादव की कार्य शैली पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
कोई खाद नकली नहीं होती
जिला कृषि अधिकारी के निरीक्षण व जांच अभियान में सब खाद को सही बताया जा रहा है। उनका कहना है कि कोई खाद नकली नहीं होती। जितने भी नकली खाद संबंधित प्रकरणों की जांच की गई है उसमें आईपीएल की खाद को नवरत्ना व इफको की बोरियों में भरकर बेचना पाया गया है। अधिकांश मामलों में होता है कि खाद व्यापारी कंपनी व जिला कृषि अधिकारी की अनुमति के बिना री-पैकिंग कर बेचा जा रहा था। इसलिए खाद को नकली नहीं कहा जा सकता।
सीजन पर किसानों को नहीं मिल पाती खाद
रबी और खरीफ के फसली सीजन में जब किसानों को खाद की आवश्यकता होती है तो प्राय: खाद समितियों व दुुकानों से नदारत रहती है। जिसके चलते किसानों को प्राइवेट दुुकानदारों से मंहगे दामों पर खाद लेना पड़ता है। किसानों की मानें तो विभाग की सांठ-गांठ के चलते खाद को गोदाम से गोदाम प्रभारियों की मदद से व्यापारी को बेंच दी जाती है। अगर विभाग की पैनी नजर इन गोदामों पर रहे तो खाद बिचौलियों के पास न जाकर समितियों के माध्यम से किसानों तक आसानी से पहुंच सकती है।
जिला कृषि अधिकारी राम कुमार यादव ने बताया कि बिना लाइसेंस खाद बेचने का कोई मामला दो वर्षों में मेरे संज्ञान में नहीं आया है। किसानों को समय पर खाद मिल सके व खाद की कालाबाजारी न हो इसके लिए तहसीलवार उर्वरक निरीक्षकों की तैनाती की जाती है तथा क्षेत्रिय कर्मचारियों की देख रेख में खाद वितरण कराया जाता है। जांच कर लगातार कार्रवाई की जाती है।