बाराबंकी। कोरोना संक्रमण के दूसरे दौर में जिले के चार बच्चों ने माता-पिता दोनों और 20 बच्चों ने मां बाप में से एक को खोया। यह संख्या अभी शुरुआती जांच में सामने आई है। जिसकी रिपोर्ट के आधार पर मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के तहत इनके लालन-पालन और पढ़ाई के लिए चार हजार रुपया प्रतिमाह की राशि परिजनों को मुहैया करायी जाएगी।
जिले में कोरोना काल में भले ही स्वास्थ्य विभाग के रिकार्ड में दो सौ से अधिक लोगों की मौत हुई हो पर कोरोना महामारी की चपेट में आने से इसकी संख्या और अधिक आंकी जा रही है। मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के तहत अनाथ हुए अथवा एक अभिभावक को खोने वालों के लालन पालन और पढ़ाई की जिम्मेदारी पूरी कराने का जिम्मा लिया गया है।
शासन के निर्देश पर हुई जांच के बाद इनमें दो दर्जन बच्चों के नाम सामने आए हैं। इन बेसहारा बच्चों की सूची और नाम उजागर करने पर रोक लगाने की बात विभाग से कही गयी है। जिला प्रशासन द्वारा तैयार सूची में चार बच्चें ऐसे हैं जिन्होंने कोविड महामारी के चलते अपने माता-पिता दोनों को खो दिया। इसके साथ 20 बच्चे ऐसे हैं जिन्होंने दोनों में से एक को गंवा दिया है। योजना के तहत 18 वर्ष से कम आयु और तीन लाख वार्षिक आय की पात्रता पूरी करने वालों को लाभ दिया जाएगा। इस श्रेणी में आने वाले पीड़ित परिवार आवेदन कर सकते हैं।
बिना कोविड के अनाथ बच्चों को भी दो हजार
गरीबी या कमाऊ माता और पिता की मृत्यु से निराश्रित बच्चों को भी प्रायोजकता कार्यक्रम के तहत लालन पालन को हर माह दो हजार रुपया मुहैया कराएगा। विभाग ने ऐसे करीब 150 बच्चों को चिह्नित कर इसके बजट की मांग की थी। विभाग को अभी 40 बच्चों को लाभांवित करने का बजट उपलब्ध कराया गया है।
कोविड से निराश्रित 24 बच्चों को योजना का लाभ मिलेगा। इसकी सूची शासन को भेजी गई है। पात्र परिवार की वार्षिक आय तीन लाख रुपये होने से विभाग को भी अधिक से अधिक पात्रों को लाभ देने में आसानी मिलेगी। प्रायोजकता कार्यक्रम के तहत भी 40 बच्चों का बजट मिला है।
अनिल कुमार मौर्या, जिला प्रोबेशन अधिकारी।