बाराबंकी। जिले की पहचान बनी चंद्रकला की मिठास का स्वाद अब लोकल से ग्लोबल होने की राह पर है। एक जनपद एक व्यंजन योजना के तहत जिले में पहले चरण में चंद्रकला निर्माण की 12 इकाइयां स्थापित की जाएंगी। सरकार इन इकाइयों पर 25 फीसदी सब्सिडी देगी। इसके लिए 36 लाख रुपये का अनुदान भी स्वीकृत किया जा चुका है। योजना के पहले चरण से करीब पांच हजार लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद है। ताकि बेहतर पैकिंग व ब्रांडिंग के सहारे इसकी पहुंच को देश-विदेश तक सुलभ बनाया जा सके।
बाराबंकी में मैदा, खोया और मावे से तैयार होने वाली चंद्रकला को जिले का व्यंजन चुना गया है। सफदरगंज और मसौली क्षेत्र में इसकी खास मांग है, जबकि शहर से लेकर कस्बों तक इसकी मिठास लोगों को खूब भाती है। फिलहाल प्रति पीस चंद्रकला 13 से 30 रुपये तक में बिक रही है।
जिले में 150 से अधिक दुकानों पर चंद्रकला बिकती है। उपायुक्त उद्योग दिनेश चौरसिया ने बताया कि प्राथमिक चरण में 12 इकाइयां स्थापित की जाएंगी। इसके लिए कारीगरों से आवेदन मांगे गए हैं। चंद्रकला को बड़े बाजार तक पहुंचाने के लिए इसकी पैकिंग को आकर्षक और आधुनिक बनाया जाएगा। इसके बाद देश के विभिन्न हिस्सों में इसकी आपूर्ति की जाएगी। प्रदेश स्तर पर योजना के लिए 100 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है।