बाराबंकी। गैंगस्टर के करीब 20 साल पुराने मामले में तीन आरोपियों की मुकदमा विचारण के दौरान मौत हो गई, जबकि बचे हुए एक आरोपी को अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया। अपर सत्र न्यायाधीश एवं गैंगस्टर एक्ट के विशेष न्यायाधीश विनय आर्या की कोर्ट ने यह फैसला सुनाया।
20 मई 2006 को कुर्सी के तत्कालीन थानाध्यक्ष अरुण कुमार शुक्ल ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी। आरोप था कि अनवारी गांव के शफीक के घर पर छापा मारा गया तो वहां चार लोग एक मवेशी का वध कर मांस को टुकड़ों में काट रहे थे। पुलिस ने बल प्रयोग कर दरवाजा खोला तो तीन आरोपी छत के रास्ते भाग गए मगर गांव निवासी तौसीफ मौके पर पकड़ लिया गया। उसी ने बाकी तीनों के नाम राजू, शफीक व तीसरे को अपना पिता रशीद बताया। पुलिस ने मौके से एक क्विंटल मांस बरामद किया। बाद में चारों आरोपियों पर गैंगस्टर भी लगाया गया।
अदालत में गवाहों ने इस पुराने मामले में कई बातें याद न होने की बात कही। मुकदमा विचारण के दौरान राजू को छोड़ बाकी तीनों आराेपियों की मृत्यु हो गई। राजू के खिलाफ विचारण जारी रहा मगर आरोप साबित नहीं हो सके। आखिरकार कोर्ट ने उसे दोषमुक्त करार दिया।