गेवारां गांव के पास चार दिन पहले कटी गेरावा नहर की पटरी को चौथे दिन भी दुरुस्त नहीं किया जा सका। इसके चलते नहर का पानी अभी भी खेतों में भर रहा है। साथ ही नहर का पानी अब गांव के पास तक पहुंच गया है। खेतों में पानी भरने से करीब 50 बीघे फसल भी बर्बाद हो गई है। विभाग की लापरवाही के चलते किसानों में काफी आक्रोश है।
सिंचाई के पानी को जरूरत अनुसार किसानों के खेत में पहुंचाने तथा भूजल स्तर को बचाए रखने के लिए सरकार नहरों का पुनरोद्धार करा रही है। परियोजना की सफलता के लिए नहर के पास के गांव के किसानों को जल संचयन के लिए जागरूक भी करने के निर्देश हैं। मगर सिंचाई विभाग की भ्रष्ट कार्यप्रणाली सरकार की मंशा पर पानी फेर रही है। घटिया निर्माण से क्षतिग्रस्त नहर की पटरी पानी छोड़ते ही कट जाती हैं। किसानों को नहर में पानी आने से फायदा होने की जगह नुकसान होने लगता है।
24 दिसंबर को गेरांवा गांव के पास गेरांवा नहर की सात मीटर पटरी कट गई थी। जिसके चलते आसपास के खेतों में पानी भर गया। ग्रामीणों ने फसल बचाने के लिए पानी का बहाव गांव के तालाब की ओर कर दिया था। मगर चार दिन बाद भी विभाग के अधिकारियों ने नहर में खांदी से बर्बाद हो रहे पानी की कोई सुध नहीं ली।
ऐसे में तालाब का पानी उफनाकर पास के खेतों से होकर बल्दीपुरवा की आबादी तक पहुंच गया है। ऐसे में चार किसानों की करीब पचास बीघे गेहूं की फसल खेत में पानी भरने से बर्बाद हो गई है। गांव के सतीश अवस्थी, महेंद्र सिंह आदि ने बताया सहायक अभियंता को सूचना दी गई है लेकिन आज कल कहकर लगातार टालमटोल कर रहे हैं।
कुछ समय पूर्व बडनापुर, बहादुरपुर व लिल्हौरा माइनर नहर में खांदी होने से किसानों की सैकड़ों बीघा फसल बर्बाद हो गई थी लेकिन विभाग इससे कोई सबक लेने को तैयार नहीं है। सिंचाई निर्माण खंड के अधिशाषी अभियंता राजेश यादव का कहना है कि गेरांवा माइनर नहर में खांदी की सूचना पर एसडीओ व जेई को मौके पर भेजा गया है। रविवार शाम तक पानी रोककर पटरी दुरुस्त करा दी जाएगी।