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अभियान: नहीं खुलते इमरजेंसी गेट, फर्स्ट एड बॉक्स में एक्सपायर दवाएं

Wed, 08 Apr 2026 02:02 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
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बाराबंकी। बच्चों के स्कूल आवागमन के लिए लगी अधिकांश बसों की स्थिति बेहद खराब है। जीपीएस और सीसीटीवी कैमरे नहीं लगे हैं। इमरजेंसी गेट भी नहीं खुलते हैं। फर्स्ट एड बॉक्स में एक्सपायर दवाएं रहती हैं। अग्निशमन यंत्र भी एक्सपायर हो गए हैं। यानी बच्चों की सुरक्षा पूरी तरह भगवान भरोसे है।
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जिले में करीब 1201 पंजीकृत स्कूल बसें हैं। 237 बसों की फिटनेस समाप्त हो गई है। इसके बावजूद ये बसें धड़ल्ले से बच्चों को लेकर सड़कों पर दौड़ रही हैं। मंगलवार को लखपेड़ाबाग मोहल्ले में एक स्कूल के बाहर खड़ी दो बसों में प्राथमिक उपचार बॉक्स तो मिले लेकिन उनमें रखी दवाएं एक्सपायर थीं। ग्रामीण अंचल में कुछ बसों में बॉक्स खाली मिले। इमरजेंसी गेट जाम मिले, जो काफी मशक्कत के बाद भी नहीं खुल रहे थे।
कई बसों में अग्निशमन यंत्र एक्सपायर थे। बसों के दरवाजे ठीक से बंद नहीं हो रहे थे। चालक बसों में लगे स्पीड गवर्नर की जानकारी नहीं दे सके। एआरटीओ प्रवर्तन अंकिता शुक्ला ने बताया कि स्कूली वाहनाें की लगातार जांच की जा रही है। स्कूल प्रबंधकों को भी नियमों का अनुपालन कराने के लिए पत्राचार किया जा रहा है।
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चार स्कूली वाहन सीज, 10 का चालान
स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर उप परिवहन आयुक्त अयोध्या राजकुमार सिंह, आरटीओ अयोध्या विश्वजीत सिंह ने मंगलवार को स्कूली वाहनों की जांच की। पायनियर पब्लिक स्कूल और रानी लक्ष्मीबाई इंटर काॅलेज का औचक निरीक्षण किया। स्कूली वाहनों की फिटनेस, परमिट, बीमा, ड्राइवर लाइसेंस आदि की जांच की। एआरटीओ अंकिता शुक्ला, पीटीओ रविचंद्र त्यागी, आरआई बलवंत सिंह यादव ने चेकिंग के दौरान दो बिना परमिट व दो बिना फिटनेस के मिले स्कूली वाहनों को सीज कर दिया। नियमों का उल्लंघन करने पर 10 स्कूली वाहनों के चालान किए गए। एआरटीओ ने बताया कि बीते वर्ष 56 और जनवरी से अब तक 23 ड्राइविंग लाइसेंस निलंंबित किए गए हैं।
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ई रिक्शा में क्षमता से ज्यादा बच्चे, सुरक्षा पर बड़ा सवाल
ओवरलोडेड वाहन बच्चों के जीवन के लिए अत्यंत खतरनाक हैं। अचानक ब्रेक, तेज मोड़ या झटका किसी भी समय हादसे का कारण बन सकता है। सिविल लाइंस में निजी स्कूल के बाहर शुक्रवार को ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने राहगीरों और अभिभावकों के होश उड़ा दिए। एक ई रिक्शा , जो अपनी क्षमता से कहीं ज्यादा बच्चों से भरा था। ई रिक्शा में 11 से अधिक स्कूली बच्चे तंग होकर बैठे थे और उनके भारी बैग रिक्शा के ऊपर रखे हुए थे। यह हाल तब है, जब स्कूली बच्चों की सुरक्षा के लिए अभियान चलाया जा रहा है। बावजूद इसके, सुरक्षा नियमों का खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा है।
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